हाल के वर्षों में आईटी सेवा कंपनियों की नई भर्तियों और आय में खासी तेजी आई है लेकिन आईटी उद्योग की आय की रफ्तार कर्मचारियों की बढ़ती लागत की तुलना में कम रही है। इसकी वजह से उद्योग का मार्जिन घट रहा है और मुनाफा वृद्धि भी कम हो रही है।
पिछले पांच वर्षों में आईटी कंपनियों की औसत वेतन एवं भत्ता लागत प्रति कर्मचारी 19.7 फीसदी बढ़ी है जबकि इस दौरान प्रति कर्मचारी शुद्ध बिक्री में 13.6 फीसदी की वृद्धि हुई है।
इसके परिणामस्वरूप वित्त वर्ष 2012 से 2022 के बीच प्रति कर्मचारी उद्योग का परिचालन मुनाफा महज 10.3 फीसदी बढ़ा है जबकि इस दौरान प्रति कर्मचारी शुद्ध मुनाफा 5.6 फीसदी बढ़ा है।
देश की छह प्रमुख सूचीबद्ध आईटी कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 में प्रति कर्मचारी 38 लाख रुपये की शुद्ध आय हासिल की, जो 2016-17 के 33.5 लाख रुपये और वित्त वर्ष 2020 के 37.3 लाख रुपये प्रति कर्मचारी से अधिक है। इसकी तुलना में कंपनियों की प्रति कर्मचारी वेतन और भत्ते की लागत वित्त वर्ष 2017 के 17.3 लाख रुपये से बढ़कर वित्त वर्ष 2020 में 20.1 लाख रुपये और पिछले वित्त वर्ष में 20.7 लाख रुपये हो गई। वेतन एवं भत्तों की लागत में तेज बढ़ोतरी से कंपनी के मुनाफा वृद्धि पर प्रतिकूल असर पड़ा है।
आईठी कंपनियों का प्रति कर्मचारी परिचालन मुनाफा वित्त वर्ष 2017 में बढ़कर औसतन 9.2 लाख रुपये था जो वित्त वर्ष 2022 में 10.4 लाख रुपये हो गया। शुद्ध मुनाफे वृद्धि भी कम रहा। वित्त वर्ष 2022 में प्रति कर्मचारी उद्योग का शुद्ध मुनाफा 6.65 लाख रुपये रहा जो वित्त वर्ष 2019 में 6.71 लाख रुपये और वित्त वर्ष 2017 में 6.3 लाख रुपये था।
यह विश्लेषण शीर्ष 6 आईटी कंपनियों – टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, इन्फोसिस, विप्रो, एचसीएल टेक्नोलॉजीज, टेक महिंद्रा और माइंडट्री के सालाना वित्तीय विवरण पर आधारित है। प्रति कर्मचारी वित्तीय पैमाना संबंधित कंपनियों में कर्मचारियों की औसत संख्या पर आधारित है। आईटी कंपनियां वित्त वर्ष के अंत में अपनी सााना रिपोर्ट में कर्मचारियों की संख्या की जानकारी देती हैं।
हमारे नमूने में शामिल 6 प्रमुख आईटी कंपनियों के कुल कर्मचारियों की संख्या वित्त वर्ष 2017 में 9.68 लाख से बढ़कर वित्त वर्ष 2022 में 14.04 लाख हो गई। वित्त वर्ष 2022 में उद्योग के कर्मचारियों की संख्या सालाना आधार पर 15.5 फीसदी बढ़ा, जो वित्त वर्ष 2012 के रिकॉर्ड 18.3 फीसदी वृद्धि के बाद सबसे ज्यादा रही। हमारे नमूने में शामिल सभी 6 कंपनियों ने वित्त वर्ष 2022 के दौरान रिकॉर्ड 1.89 लाख कर्मचारियों को जोड़ा है। इसकी तुलना में इन फर्मों की समेकित शुद्ध बिक्री वित्त वर्ष 2022 में 19.1 फीसदी बढ़ी जबकि उनका वेतन एवं भत्तों का खर्च 19.5 फीसदी बढ़ा। इस दौरान परिचालन मुनाफा 13.3 फीसदी और शुद्ध मुनाफा 15.5 फीसदी की कम दर से बढ़ा है।
पिछले वित्त वर्ष में इन 6 कंपनियों का औसत परिचालन मुनाफा मार्जिन घटकर कुल आय का 26.23 फीसदी रहा जो इससे एक साल पहले 27.57 फीसदी और पांच साल पहले वित्त वर्ष 2017 में 26.62 फीसदी था। पहली तिमाही में उद्योग का मार्जिन और कम हुआ है क्योंकि घर से काम करने की सुविधा बंद होने से लागत में जो बचत हो रही है वह खत्म हो गई।
वित्त वर्ष 2022 की पहली तिमाही में औसत परिचालन मार्जिन घटकर दशक के निचले स्तर 23.2 फीसदी रह गया और उद्योग की मुनाफा वृद्धि भी इस दौरान सालाना आधार पर लगभग स्थिर रही।
विश्लेषकों का कहना है कि मार्जिन में गिरावट कर्मचारियों की उत्पादकता कम रहने की वजह से नहीं बल्कि मुख्य रूप से वेतन-भत्तों की लागत बढ़ने की वजह से आई है। सिस्टमैटिक्स ग्रुप में रणनीति एवं शोध प्रमुख धनंजय सिन्हा ने कहा, ‘कर्मचारियों की नौकरी छोड़ने की दर अधिक रहने की वजह से कंपनियों को नई भर्तियां करने और कर्मचारियों को अपने साथ बनाए रखने के लिए वेतन में इजाफा करना पड़ा। साथ ही अमेरिकी बाजार में वेतन बढ़ने से भी कंपनियों पर असर पड़ा है।’
उनके अनुसार यह आईटी उद्योग के चक्र का हिस्सा है और वेतन खर्च का दबाव और मार्जिन पर इसका प्रतिकूल असर वित्त वर्ष 2024 से कम होना शुरू हो सकता है। चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में मार्जिन पर दबाव और कम मुनाफा वृद्धि से पूरे वित्त वर्ष में आईटी कंपनियों की कमाई घटने की आशंका है।