रेनो और निसान मिलाकर चेन्नई में जो प्लांट बना रही हैं, उसमें काफी खाली जगह होगी। वजह यह है कि रेनो ने इस योजना पर फिलहाल के लिए रोक दिया है, जबकि उसकी सहयोगी निसान ने अपनी योजना के मुताबिक काम जारी रखने का फैसला किया है।
तैयार होने के बाद हर साल चार लाख कारों के उत्पादन में सक्षम इस प्लांट की योजना इन दोनों कंपनियों की जरूरतों को ध्यान में रखकर बनाई गई थी। पहले इसमें महिंद्रा ऐंड महिंद्रा भी शामिल थी, लेकिन पिछले साल कंपनी ने अपने पैर वापस खींच लिए थे।
सूत्रों के मुताबिक निसान मोटर कंपनी अपनी तय योजना के तहत अगले साल की शुरुआत में इस प्लांट से उत्पादन शुरू कर देगी। इस फैक्टरी से उसकी पहली कार जून, 2010 के आस-पास तक तैयार होकर निकलेगी।
इन दोनों कंपनियों ने इस परियोजना में अब तक 800 करोड़ रुपये लगाए हैं, जबकि इसमें कुल मिलाकर 4,500 करोड़ रुपये का निवेश किया जाना था। हालांकि, कंपनी को मंदी की वजह से पैसों की जबरदस्त कमी का सामना करना पड़ रहा है।
इस वजह से इस प्लांट से उत्पादन शुरू में धीमा ही रहेगा। इस प्लांट से कंपनी अपनी कम ईंधन का इस्तेमाल करने वाली कॉम्पैक्ट कार माइक्रा का उत्पादन करेगी। साथ ही, कंपनी की कई दूसरी कारें भी इस प्लांट में बनाई जाएंगी।
माइक्रा को भारत को ध्यान में रखकर फिर से डिजाइन किया जाएगा। इस वक्त यह कार ब्रिटेन और अमेरिका जैसे विकसित बाजारों में बिक रही है। भारत में इसका असल मुकाबला मारुति सुजुकी और हुंडई मोटर इंडिया की कॉम्पैक्ट कारों से होगा।
इस वक्त निसान की एसयूवी सेगमेंट में एक्सटे्रल और प्रीमियम सेगमेंट में टीएना कारें भारत में मौजूद हैं। इन दोनों कारों की कीमत काफी ज्यादा है क्योंकि इन्हें भारत में आयात किया जाता है। इस वजह से उनकी कीमत में कई तरह के कर और शुल्क भी जुड़ जाते हैं, जो इसकी कीमत को कई गुना बढ़ा देते हैं।
दूसरी तरफ, रेनो ने चेन्नई से उत्पादन शुरू करने की अपनी योजना ठंडे बस्ते में डाल दी है। कंपनी इस प्लांट में चार प्लेटफॉर्म बना रही थी, जिसके जरिये कंपनी कई तरह के मॉडलों को तैयार कर पाती।
लेकिन पैसों की कमी की वजह वजह से कंपनी ने फिलहाल इस पर आगे बढ़ने का फैसला नहीं किया है। वैसे, चेन्नई का यह प्लांट इकलौता नहीं है, जहां रेनो ने काम रोक दिया है। कंपनी दुनिया भर में नए प्लांटों के मामले में काफी फूंक-फूंक कर कदम रख रही है।
इस फ्रेंच कंपनी को इस वक्त पूंजी की सख्त जरूरत है। उसने फ्रांस सरकार को वादा किया है कि कम से कम फ्रांस में तो वह छंटनी नहीं करेगी। पिछले हफ्ते कंपनी को फ्रांस सरकार की तरफ से तीन अरब यूरो का कर्ज मिला था, जिस पर उसे छह फीसदी का ब्याज हर साल देना है।
हालांकि, अगर कंपनी की हालत में सुधर होता है, तो ब्याज दर बढ़ भी सकती है। वैसे, दोनों कंपनियों ने भारत को भविष्य के लिहाज से एक अहम बाजार करार दिया है। साथ ही, रेनो के अधिकारी का यह भी कहना है कि कंपनी निकट भविष्य में भारत से तो अपना बोरिया-बिस्तर नहीं ही समेटने वाली।
इस प्लांट में रेनो और निसान ने वेहिकल प्लेटफॉम का इस्तेमाल साथ मिलकर करने की योजना बनाई थी। लेकिन दोनों कंपनियों ने अपने अलग-अलग प्रोडक्शन लाइंस बनाने की योजना बनाई थी। वजह यह थी कि दोनों कंपनियां किसी तरह का विवाद नहीं चाहती थीं।