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रिलायंस की हुई नेटमेड्स

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Last Updated- December 15, 2022 | 3:11 AM IST

ऑनलाइन फार्मेसी क्षेत्र एक प्रमुख सुदृढीकरण से गुजर रहा है। मंगलवार की रात रिलायंस इंडस्ट्रीज ने रिलायंस रिटेल के जरिये नेटमेड्स के अधिग्रहण की घोषणा की। आरआईएल ने एग्रीटेक और एडटेक के अलावा ई-फार्मा को वृद्धि को रफ्तार देने वाले तीन प्रमुख क्षेत्रों के रूप में पहचान की है। रिलांयस ने 8.3 करोड़ डॉलर के एक सौदे के तहत वाइटैलिक हेल्थ में 60 फीसदी हिस्सेदारी खरीदी है। साथ ही एक अन्य घटनाक्रम के तहत फार्माईजी के सूत्रों ने कहा कि कंपनी कथित तौर पर मेडलाइफ के साथ विलय की संभावनाएं तलाश रही है ताकि विश्लेषकों के अनुसार 1.2 अरब डॉलर की कंपनी सृजित की जा सके।
फ्रोस्ट ऐंड सुलिवान के अनुसार, भारत में ई-फार्मेसी का बाजार 2018 में करीब 51.2 करोड़ डॉलर का था जो 63 फीसदी सीएजीआर के साथ बढ़ रही है और उम्मीद की जा रही है कि 2022 तक इसका आकार बढ़कर 3.6 अरब डॉलर से अधिक हो जाएगा। वास्तव में अगले 10 वर्षों के दौरान दवाओं की कुल बिक्री में ई-फार्मेसी के जरिये होने वाली बिक्री की हिस्सेदारी 15 से 20 फीसदी हो सकती है। फिलहाल उसकी बाजार हिस्सेदारी 2-3 फीसदी से अधिक नहीं है और ई-फार्मेसी की कुल बिक्री में महानगरों का योगदान 75 फीसदी से अधिक है।
मॉर्गन स्टैनली के अनुसार, इस कारोबार के आकार से पता चलता है कि वित्त वर्ष 2018 में उसे महज 10 लाख डॉलर के राजस्व पर 80 लाख डॉलर का नुकसान हुआ था। हालांकि अब उसकी मौजूदबी देश के 670 शहरों और कस्बों तक हो चुकी है और वह 70,000 से अधिक पर्ची वाली दवाओं एवं जीवनशैली की दवाओं की पेशकश करती है। इतने बड़े वितरण नेटवर्क को तैयार करने में उसे वर्षों लग सकते थे।
रिलायंस औषधि क्षेत्र में उतरने वाली नई कंपनी है और उसने जियोहेल्थहब के जरिये इस कारोबार में कदम रखा है। लेकिन उसने फिलहाल यह तय नहीं किया है कि स्वास्थ्य की जांच, फिटनेस ट्रैकर, लैब परीक्षण अथवा ऑनलाइन परामर्श में से किन सेवाओं की पेशकश करेगी। उसके पास फिलहाल कोई ई-फार्मेसी कारोबार भी नहीं है जिससे राजस्व को रफ्तार दी जा सके। ऐसे में नेटमेड्स का अधिग्रहण रिलायंस के लिए काफी महत्त्वपर्णू साबित होगा जो उसकी कमियों को पूरा करेगी। अब उसके ग्राहक ऑनलाइन दवा भी मंगा सकते हैं। साथ ही रिलायंस को इससे डॉक्टर सलाह से लेकर जांच, फिटनेस एवं ई-फार्मेसी तक एकीकृत सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी।
जियोहेल्थहब के सब्सक्राइबरों की संख्या भी सीमित रही है जो उसकी राह की एक प्रमुख बाधा बनी हुई है। सिमिलरवेब के 20 मई के आंकड़ों के अनुसार, इसके दैनिक उपयोगकर्ताओं की संख्या 10,000 और डाउनलोड की संख्या भी 10 हजार है। इसके विपरीत बोफा रिपोर्ट के अनुसार, नेटमेड्स के डाउनलोड की संख्या 50 लाख के पार पहुंच चुकी है और वह 30 फीसदी बाजार हिस्सेदारी के साथ देश की सबसे बड़ी ई-फार्मेसी कंपनी है। जाहिर तौर पर इस अधिग्रहण से रिलायंस को जल्द ही बाजार में अग्रणी स्थिति हासिल करने में मदद मिलेगी।
हालांकि फिलहाल यह स्पष्ट नहीं है कि रिलायंस नेटमेड्स की उस योजना को आगे बढ़ाएगी अथवा नहीं जिसके तहत 20 फिजिकल रिटेल आउटलेट खोलने की योजना था। कई विश्लेषकों का कहना है कि वह ऑफलाइन और ऑनलाइन दोनों मिलाकर आगे बढ़ेगी जैसा उसने अन्य क्षेत्रों में भी किया है। साथ ही सूत्रों ने यह भी कहा कि रिलायंस समूह खुद अपने दम पर नैदानिक कारोबार में भी उतरने की योजना बना रहा है और रिलायंस लाइफ साइंसेज के पास पहले से ही एक लैब उपलब्ध है।

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First Published - August 20, 2020 | 12:22 AM IST

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