बाजार नियामक सेबी ने कहा है कि प्रवर्तक के परिजन के आम शेयरधारक के तौर पर दोबारा वर्गीकृत नहीं किया जा सकता, चाहे वह स्वतंत्र रूप से रहता हो या कंपनी की गतिविधियों में उसकी कोई भूमिका न हो।
नियामक ने यह राय जूता विनिर्माता मिर्जा इंटरनैशनल की तरफ से मांगे गए अनौपचारिक दिशानिर्देश के रूप में दी।
सेबी को लिखे पत्र में रेड टेप ब्रांड की मालिक मिर्जा इंटरनैशनल ने दिशानिर्देश मांगा था कि क्या प्रबंध निदेशक की विवाहित पुत्रियां और सूचीबद्ध कंपनी में 10 फीसदी से ज्यादा मताधिकार रखने वाले प्रवर्तक को प्रवर्तक समूह से आम शेयरधारक की श्रेणी में दोबारा वर्गीकृत किया जा सकता है क्योंकि वह अलग रहते हैं और कंपनी के प्रबंधन में उनकी कोई भूमिका नहीं है।
इसका जवाब देते हुए बाजार नियामक ने कहा है, इश्यू ऑफ कैपिटल ऐंड डिस्क्लोजर रिक्वायरमेंट यानी आईसीडीआर के तहत प्रवर्तक समूह की परिभाषा के मुताबिक प्रवर्तकों की पुत्री नजदीकी परिजन है और प्रवर्तक समूह का हिस्सा है, चाहे उसका विवाह क्यों न हो गया हो और अलग रहती हो या कंपनी के प्रबंधन में उसकी कोई भूमिका न हो।
मिर्जा इंटरनैशनल के प्रबंध निदेशक आर मिर्जा के पास कंपनी की 11.27 फीसदी हिस्सेदारी है और उसकी योजना इसका कुछ भाग अपनी दोनों विवाहित पुत्रियों को उपहार के रूप में देने की है, जिसके पास कंपनी के शेयर नहीं हैं और न ही प्रवर्तक समूह में उनका नाम है। कंपनी की तरफ से सेबी को लिखे पत्र से यह खुलासा हुआ है।
नियामक ने कहा है कि एलओडीआर के नियम 31 (ए) (6) में कहा गया है कि अगर प्रवर्तक समूह की हिस्सेदारी उपहार में दी जाती है तो इसके प्राप्तकर्ता को तत्काल प्रवर्तक या प्रवर्तक समूह के परिजन के तौर पर वर्गीकृत किया जाना चाहिए।