सरकारी फर्मों को कठिन लक्ष्य देने की योजना

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 10:43 AM IST

सार्वजनिक कंपनियों का सालाना वित्तीय लक्ष्य कठिन हो सकता है। केंद्र सरकार के मसौदा दस्तावेज और सूत्रों के मुताबिक कंपनियों का मूल्यांकन बढ़ाने के लिए सरकार ऐसा करने की योजना बना रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा कुछ कंपनियों के निजीकरण पर जोर दिए जाने को देखते हुए यह बदलाव प्रस्तावित हैं।
राजकोषीय घाटे पर लगाम लगाने की कवायद कर रही सरकार चाहती है कि सरकारी फर्में 2021-22 में अपने बाजार पूंजीकरण और लाभांश भुगतान पर ध्यान दें, जो अप्रैल से शुरू हो रहा है। साथ ही सूत्रों ने यह भी कहा कि सरकार चाहती है कि कंपनियां अपनी गैर प्रमुख संपत्तियों की बिक्री में तेजी लाएं।
सरकारी कंपनियां परंपरागत रूप से उत्पादन व राजस्व बढ़ाने पर ध्यान केंद्रित करती हैं, न कि कुशलता में सुधार और मूल्यांकन  पर जोर देती हैं। इसकी वजह से बाजार में उनके शेयर की कीमतों का प्रदर्शन बहुत बेहतर नहीं रहता है।
योजना की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने कहा, ‘कंपनियों को बदलते कारोबारी माहौल में मूल्यांकन और मुनाफा बढ़ाने की जरूरत है। अगर ऐसा होता है, तभी हम बेहतर दाम (हिस्सेदारी बेचकर) पाने में सफल होंगे। शेयरधारकों व और निवेशकों को भी तभी फायदा पहुंचाया जा सकेगा।’  
2019 में दोबारा सत्ता में आने के बाद मोदी सरकार ने तेल एवं प्राकृतिक गैस निगम, इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन, एनएमडीसी लिमिटेड, कोल इंडिया, भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड और बीईएमएल लिमिटेड में हिस्सेदारी बेचकर 5 साल में 3.25 लाख करोड़ रुपये जुटाने की योजना तैयार की है।
सरकार ने कंपनियों के गैर रणनीतिक हिस्से के निजीकरण करने की घोषणा करने के साथ प्रमुख क्षेत्रों में फर्मों की संख्या कम करने की घोषणा की है। सरकार ने पहले ही भारत पेट्रोलियम, कंटेनर कॉर्पोरेशन और शिपिंग कॉर्पोरेशन के निजीकरण की कवायद शुरू कर दी है।
बहरहाल निवेश की धारणा कमजोर होने और सीमित मांग की वजह से इसमें देरी हो रही है। इस वित्त वर्ष में मार्च 21 के अंत तक सरकार ने 1.2 लाख करोड़ रुपये हिस्सेदारी बेचने के लक्ष्य में सिर्फ 10 प्रतिशत हासिल किया है।
दूसरे सूत्र ने बताया कि सालाना लक्ष्य में बदलाव की घोषणा अगले साल के केंद्रीय बजट में पेश किया जाएगा, जो फरवरी में आने वाला है। सूत्र ने कहा, ‘सरकारी कंपनियों को संपत्ति के मुद्रीकरण के माध्यम से मिले धन को कर्ज के पुनर्भुगतान जैसे कार्यों में लगाना होगा।’
सूत्र ने कहा कि भारत में पहली बार ब्याज, कर, मूल्य ह्रास और ऋण परिशोधन के पहले कमाई (ईबीआईटीडीए)  जैसे आधारों को सरकारी कंपनियों के सालाना लक्ष्य में शामिल किया जाएगा। इस सिलसिले में तैयार किया गया एक मसौदा दिशानिर्देश सरकार की समिति के पास है।

First Published : December 22, 2020 | 12:16 AM IST