दवा कंपनी फाइजर ने अपनी प्रतिद्वंद्वी कंपनी वायथ का खरीद सौदा 68 अरब डॉलर में कर लिया। इस सौदे के निपट जाने के बाद अब इन दोनों की सूचीबद्ध भारतीय सहयोगियों का भी आपस में विलय होगा।
विलय के बाद बनने वाली कंपनी करीब 1,500 करोड़ रुपये का सालाना राजस्व उगाहेगी। इससे वह संयुक्त कंपनी देश के 10 शीर्ष दवा निर्माताओं में शामिल हो जाएगी।
उल्लेखनीय है कि फाइजर बिक्री के लिहाज से ग्लैक्सोस्मिथक्लाइन के बाद घरेलू बाजार की दूसरी सबसे बड़ी दवा कंपनी है।
वायथ जिसने पिछले साल करीब 400 करोड़ रुपये की दवा बेची थी, फाइजर को 10 बड़ी दवा कंपनियों की जमात में शामिल होने में मदद करेगी।
दवा उद्योग के एक जानकार ने बताया कि यह विलय दोनों कंपनियों के हित में है। इससे फाइजर को टीके के बाजार पकड़ बनाने में मदद मिलेगी।वायथ की पकड़ पहले से ही टीके और एंटीबायोटिक्स बाजार पर है।
मालूम हो किवायथ के प्रवर्तकों के पास सूचीबद्ध भारतीय सहायक कंपनी में 57 फीसदी की हिस्सेदारी है। फाइजर औरवायथ के भारतीय सहयोगी इकाइयों ने हालांकि विलय के मुद्दे पर कुछ भी बोलने से मना कर दिया है। पता हो कि फाइजर के भारत में 2,000 से ज्यादा कर्मचारी हैं।
वहींवायथ के कर्मचारियों की संख्या करीब 800 है। विशेषज्ञों के अनुसार, फाइजर औरवायथ दोनों कंपनियों का कारोबार अलग-अलग क्षेत्रों में है।
ऐसे में इस विलय का कर्मचारियों की संख्या पर शायद ही कोई असर पड़े। विलय के बाद बनी संस्था लैटिन अमेरिका, पश्चिम एशिया और चीन जैसे तेजी से तरक्की कर रहे देशों में अपनी महत्वपूर्ण उपस्थिति दर्ज कराएगी।