सरकारी क्षेत्र की सबसे बड़ी तेल और गैस कंपनी ONGC ने घरेलू स्तर के उत्पादन पर लगाए जाने पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स को खत्म करने की मांग की है। कंपनी का कहना है कि वैश्विक स्तर पर हो रही ऊर्जा कीमत में बढ़ोतरी को देखते हुए आय बढ़ाने के लिए दूसरे तरीके (डिविडेंड रूट) का इस्तेमाल करना चाहिए। समाचार वेबसाइट मनीकंट्रोल के अनुसार सरकारी क्षेत्र की तेल और गैस कंपनी ONGC के प्रबंधन ने बताया कि घरेलू तेल उत्पादकों पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाना गलत है। खासतौर पर जब सरकार रूस से तेल आयात कर काफी बचत की है।
क्या होता है विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स
सरकार द्वारा कंपनियों पर लगाए जाने वाले टैक्स को विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स कहा जाता है। यह टैक्स कंपनियों के अधिक और अप्रत्याशित कमाई पर लगाया जाता है। तेल कंपनियों पर यह टैक्स जुलाई के शुरुआत में लगाया गया था क्योंकि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में भारी बढ़ोतरी देखी गई थी। रूस- यूक्रेन युद्ध के बाद तेल की कीमत में काफी तेजी देखी गई जिसके कारण तेल कंपनियों का मुनाफा काफी बढ़ गया था। इसे देखते हुए सरकार द्वारा तेल कंपनियों पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाया गया था। भारत के साथ साथ ब्रिटेन और इटली ने भी तेल कंपनियों के पर विंडफॉल प्रॉफिट टैक्स लगाया था।
रूस से तेल आयात करने से फायदा
रूस- यूक्रेन युद्ध के बाद भारत सरकार द्वारा रूस से सस्ते दाम में कच्चे तेल का आयात किया गया। इससे सरकार को लगभग 35,000 करोड़ से अधिक की बचत हुई। ONGC का मानना है कि सरकार को इस बचत का इस्तेमाल घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में किया जाना चाहिए।
35,000 करोड़ की हुई बचत
रूस से खरीदे गए सस्ते कच्चे तेल से भारत सरकार को 35,000 करोड़ रुपये की बचत हुई। ONGC का कहना है कि इसका इस्तेमाल घरेलू उत्पादन को बढ़ाने में किया जाना चाहिए। ओएनजीसी प्रबंधन की मानें तो रूसी तेल खरीद से होने वाली बचत को उस कंपनी को दें जो देश की कुछ चुनिंदा परियोजनाओं में निवेश करती हो। कंपनियों पर विंडफॉल टैक्स लगाने के बजाय मुनाफा बढ़ाने की अनुमति दी जानी चाहिए। ONGC नियमानुसार अपने लाभांश का 30 प्रतिशत सरकार को देती है।