भारत बायोटेक की कोवैक्सीन और जाइडस कैडिला की जाइकोव-डी के बाद अब पुणे की सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (एसआईआई) भी अमेरिकी कंपनी नोवावैक्स के कोविड-19 टीका कैंडिडेट का बच्चों पर चिकित्सकीय परीक्षण इस महीने शुरू करने जा रही है। सूत्रों ने यह दावा किया है। माना जा रहा है कि यह टीका करीब 90 फीसदी असरदार है, लेकिन इसे दुनिया भर में कहीं इस्तेमाल की मंजूरी नहीं मिली है।
एक विशेषज्ञ समिति ने जुलाई में केंद्रीय औषधि मानक नियंत्रण संगठन (सीडीएससीओ) से सिफारिश की थी कि एसआईआई को नोवावैक्स के कोविड-19 कैंडिडेट कोवोवैक्स के दूसरे और तीसरे चरण के परीक्षणों की मंजूरी दी जाए। इसके बाद एसआईआई दो से 17 साल तक के बच्चों पर परीक्षण शुरू करने की तैयारी कर रही है। इस परीक्षणों में देश में 10 जगहों के करीब 920 बच्चों को शामिल किया गया जाएगा और उन्हें दो समूहों 2 से 11 साल और 12 से 17 साल में बांटा जाएगा। ब्लाइंड, रैंडम, प्लेसिबो नियंत्रित अध्ययन का मकसद बच्चों के समूह पर नोवावैक्स कैंडिडेट की प्रतिरक्षा, सहनशीलता और सुरक्षा का परीक्षण करना है। सूत्रों ने कहा, ‘ये परीक्षण अगस्त में शुरू होंगे।’ एसआईआई ने इस मुद्दे पर कुछ कहने से इनकार कर दिया। हालांकि पुणे स्थित यह टीका विनिर्माता कंपनी पहले ही कोवोवैक्स टीके का उत्पादन शुरू कर चुकी है।
हालांकि पहली कोशिश में नियामक की मंजूरी नहीं मिली थी। नोवावैक्स के टीके का बच्चों पर चिकित्सकीय परीक्षण करने के एसआईआई के प्रस्ताव को विषय विशेषज्ञ समिति (एसईसी) ने इस आधार पर खारिज कर दिया गया था कि नोवावैक्स के वयस्कों के टीके को अभी किसी भी देश में इस्तेमाल की मंजूरी नहीं मिली है।
इसके बाद एसआईआई ने जुलाई के आखिर में संशोधित अध्ययन प्रोटोकॉल जमा कराया। इसमें कंपनी ने दावा किया कि अमेरिका की नोवावैक्स विभिन्न देशों के वयस्कों में बड़ी मात्रा में सुरक्षा आंकड़े सृजित कर चुकी है। इसके पास ब्रिटेन, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया सहित विभिन्न देशो के 50,000 वयस्कों के आंकड़े हैं। इसके अलावा 2,200 से बच्चों का भी सुरक्षा डेटा है। टीका परीक्षण की भारतीय इकाई (एसआईआई परीक्षण कर रही है) के पास करीब 1,600 भागीदार हैं और इन परीक्षणों में सुरक्षा को लेकर किसी तरह की चिंता सामने नहीं आई है।
कंपनी ने आग्रह किया कि अगर भारतीय चिकित्सकीय परीक्षणों में बच्चों के समूह को भी शामिल किया जाएगा तो यह टीका उसी समय बच्चों की आबादी के लिए भी उपलब्ध होगा, जब इसे वयस्कों में आपात इस्तेमाल की मंजूरी देने के बारे में विचार किया जाएगा। देश की एक अन्य टीका विनिर्माता कंपनी जाइडस कैडिला ने इसी रास्ते पर चल रही है। जाइडस ने अपने भारतीय चिकित्सकीय परीक्षणों में 12 साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों के एक समूह को शामिल किया था। अब इसके टीके को आपात इस्तेमाल की मंजूरी देने की समीक्षा हो रही है, इसलिए यह बच्चों के टीके को भी मंजूरी मिलने की उम्मीद कर रही है।
जाइडस ने पांच साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों पर भी परीक्षण शुरू करने की योजना बनाई है, जबकि हैदराबाद स्थित भारत बायोटेक पहले ही दो साल और उससे अधिक उम्र के बच्चों पर कोवैक्सीन का परीक्षण शुरू कर चुकी है। पिछले साल एसआईआई और नोवावैक्स के बीच एक लाइसेंस समझौता हुआ था। इसके तहत एसआईआई निम्न एवं मध्यम आय देशों और भारत में नोवावैक्स के कैंडिडेट एनवीएक्स-सीओवी2373 को विकसित और इसकी व्यावसायिक बिक्री करेगी। जनवरी में नोवावैक्स ने कहा था कि उसका टीका कैंडिडेट एनवीएक्स-सीओवी2373 का परीक्षण सफल रहा। यह ब्रिटेन में आयोजित तीसरे तरण के चिकित्सकीय परीक्षण में 89.3 फीसदी असरदार रहा।