facebookmetapixel
Advertisement
देश की फैक्ट्रियों ने पकड़ी रफ्तार! IIP के आंकड़ों ने दिया बड़ा संकेत, आगे क्या होगा?Fed के रेट कट की आशंका में गिरे सोना-चांदी, ग्लोबल मार्केट में सोना फिर 4,000 डॉलर से नीचेदोहा वार्ता से पहले तेल बाजार में हलचल! कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट, क्या अब सस्ता होगा पेट्रोल-डीजल?तमिलनाडु की Liquor Policy में बदलाव से इन शेयरों की चांदी! Radico समेत 3 पर BUY रेटिंग, चेक करें टारगेटअब मोबाइल नंबर रहेगा पूरी तरह सीक्रेट! WhatsApp का नया Username फीचर बढ़ाएगा प्राइवेसीStock Market Update: शेयर बाजार की रफ्तार पड़ी धीमी! Sensex ऊपरी स्तर से फिसला, Nifty 23,900 के करीब; Eicher Motors, Tata Consumer टूटेVedanta Demerger: डिमर्जर के बाद इस कारोबार से आएगी सबसे ज्यादा कमाई, शेयर पर ₹350 का टारगेटEmkay Portfolio Update: HPCL को किया बाहर, Bharat Forge समेत इन 3 शेयरों को मिली एंट्रीStocks To Watch Today: आज इन शेयरों में होगा बड़ा एक्शन! Power Grid से HDFC Bank तक, निवेशकों के लिए आए कई बड़े अपडेटअमेरिका-ईरान तनाव से शेयर बाजार टूटा! सेंसेक्स 372 अंक गिरा, कल एक्सपायरी में क्या होगा?

नकदी नहीं, तो खरीद कैसी

Advertisement
Last Updated- December 08, 2022 | 11:07 AM IST

बाजार की हालत तो इस समय खराब ही नजर आ रही है। दरअसल मंदी ने बैंकों को जो मार लगाई है, उसका असर लक्जरी वस्तुएं मसलन कंज्यूमर डयूरेबल्स पर ज्यादा पड़ रहा है।


फाइनैंस मुश्किल है, महंगे उत्पाद खरीदे नहीं जा रहे हैं। यह दिक्कत अगले साल भी बरकरार रहेगी। इसे भूल जाएं, तब भी आम उपभोक्ता के बीच निराशा का माहौल पसरा है। खास तौर पर नौकरीपेशा लोगों के सामने छंटनी की तलवार लटकी है।

कंज्यूमर डयूरेबल्स कंपनियों को सबसे ज्यादा ग्राहक आईटी, बीपीओ और वित्तीय सेवा क्षेत्रों से ही मिलते थे, लेकिन अब उनकी नौकरी ही नहीं बच रही। ऐसे में खरीदारी कौन करेगा। मेरे खयाल से अनिश्चितता का यह माहौल तब तक बरकरार रहेगा, जब तक कंपनियां रणनीति नहीं बदलेंगी।

कंपनियां लागत कम करने के तमाम उपाय आजमा लेंगी, तो कंज्यूमर डयूरेबल्स बाजार भी सुधरेगा। छंटनी का डर खत्म हो जाएगा, तो लोग पैसे बचाने के बचाय खर्च करना शुरू कर देंगे। लेकिन कम से कम पहली छमाही में तो इसके आसार न के बराबर हैं।

एक और खास बात यह होगी कि कंपनियां कीमत पर ध्यान देंगी। एलजी जैसी कंपनियां महंगे उत्पादों के जरिये एक खास वर्ग के पास जा रही हैं, लेकिन अब उन्हें खुद को बदलना पड़ सकता है। सस्ते उत्पाद बनेंगे और लागत कम करने के लिए छंटनी जैसे उपाय भी किए जाएंगे।

इसके अलावा वेतन में मामूली इजाफे की ही उम्मीद लगानी चाहिए, वह भी योग्य कर्मचारियों को मिलेगा।हां, यह बात बिल्कुल तय है कि ये कंपनियां पहले की तरह भारी भरकम कारोबारी वृद्धि नहीं कर सकेंगी। बाजार में इजाफा होगा भी, तो कम से कम रफ्तार के साथ।

मंदी में एक ही अच्छी खबर है कि फसल शानदार हुई है। इससे गांवों में खरीदारों के पास पैसा आएगा और उसका कुछ हिस्सा इन कंपनियों के हिस्से भी आ जाएगा। जाहिर है कि छोटे शहरों और गांवों में बाजार तलाशने से 2009 में इनके लिए परेशानी कम हो सकती हैं।

(बातचीत :  ऋषभ कृष्ण)

मंदी तो है, लेकिन नए उत्पादों के जरिये बिक्री बढ़ाने की कोशिश होगी

मून बी शिन
प्रबंध निदेशक, एलजी इलेक्ट्रॉनिक्स


छोटे शहरों के बाजार बढ़ेंगे, जिससे बिक्री में भी होगा इजाफा

रवींद्र जुत्शी
उप प्रबंध निदेशक सैमसंग इंडिया

Advertisement
First Published - December 25, 2008 | 11:27 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement