5जी फिक्स्ड वायरलेस एक्सेस (एफडब्ल्यूए) की पेशकश के जरिये करीब 10 करोड़ परिवारों तक पहुंच बनाने की रिलायंस जियो योजना उसे इस क्षेत्र में दुनिया की सबसे बड़ी कंपनियों में से एक बना सकती है।
लेकिन इससे परिवारों के लिए उसकी फाइबर-टु-द होम (एफटीटीएच) ब्रॉडबैंड पेशकश की पिछली रणनीति से काफी बदलाव भी आ रहा। इन प्रयासों के बावजूद, दो साल में, जियो एफटीटीएच के साथ सिर्फ 70 लाख परिवारों को जोड़ने में सक्षम रही है, क्योंकि इसके लिए अनुमति एक प्रमुख समस्या बन गई है और पेशकश के लिए पाइपलाइन बिछाने की प्रक्रिया भी धीमी और जटिल रही है।
एफटीटीएच को अब 5जी वायरलेस एक्सेस से बदलाव जाएगा, जिससे इसकी पेशकश में तेजी आएगी। कंपनी इस पर भी ध्यान दे रही है कि ग्राहक वैश्विक तौर पर 5जी से क्या चाहते हैं। जीएसएमए इंटेलीजेंस द्वारा पिछले साल भारत, चीन, अमेरिका और ब्रिटेन समेत 10 देशों में कराए गए स्मार्टफोन उपयोगकर्ताओं के सर्वेक्षण में कहा गया कि 42 प्रतिशत लोगों ने एफडब्ल्यूए सेवा को बेहद उपयोगी माना है। रिलायंस जियो द्वारा निर्धारित 10 करोड़ परिवारों का लक्ष्य बेहद महत्वपूर्ण है, क्योंकि इसकी टीवी (पेड एवं फ्री) के साथ देश में 30 करोड़ परिवारों के एक-तिहाई तक पहुंच है। ऐसे 10 करोड़ परिवार भी हैं, जिनके पास टेलीविजन भी नहीं हैं।
जीएसएमए इंटेलीजेंस की जून 2022 की रिपोर्ट के अनुसार, 52 देशों में 5जी एफडब्ल्यूए कनेक्शन वर्ष 2025 तक सिर्फ 4 करोड़ परिवारों तक पहुंचने का अनुमान है। दरअसल, 2021 में कुल परिवारों के प्रतिशत के तौर पर एफडब्लयूए पहुंच अमेरिका में महज 1 प्रतिशत थी और पोलैंड16 प्रतिशत के साथ इस संदर्भ में शीर्ष पर था। स्पष्ट है कि मुकेश अंबानी भारत में 5जी एफब्ल्यूए के लिए बड़ी भागीदारी हासिल करने की संभावना तलाश रहे हैं।
विश्लेषकों का मानना है कि यदि जियो अपने लक्ष्य को हासिल करती है तो वह मिश्रित (मोबाइल और ब्रॉडबैंड) औसत राजस्व प्रति उपयोगकर्ता (एआरपीयू) में शानदार वृद्धि दर्ज कर सकती है, जो मौजूदा 170 रुपये से बढ़कर 250-300 रुपये के बीच रह सकती है। इसकी वजह यह है कि डायरेक्ट-टु-होम ग्राहकों का एआरपीयू मोबाइल ग्राहकों के औसत एआरपीयू के मुकाबले तीन-चार गुना है। वोडाफोन आइडिया लिमिटेड (वीआईएल) द्वारा कराए गए एक अध्ययन से पता चलता है कि 5जी पेश करने वाले 23 देशों ने पहली 6-10 तिमाहियों में अपने एआरपीयू में महज 1 प्रतिशत तक का इजाफा दर्ज किया। भारत में दूरसंचार कंपनियों का कहना है कि वे 4जी से 5जी के लिए बहुत ज्यादा कीमत वृद्धि करने पर विचार नहीं कर रही हैं।