प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
सूचना प्रौद्योगिकी कंपनियों का कहना है कि ग्राहकों के गैर-जरूरी खर्च अभी भी दबाव में हैं जिससे वित्त वर्ष 2026 की तीसरी तिमाही में अनिश्चित मांग के माहौल का सामना करना पड़ा। इससे आईटी कंपनियों को साल की दूसरी छमाही में वृद्धि को गति देने के लिए लागत घटाने और कर्मचारियों की दक्षता बढ़ाने पर जोर देना पड़ रहा है।
हालांकि अक्टूबर-दिसंबर तिमाही आईटी उद्योग के लिए मौसमी रूप से कमजोर होती है क्योंकि अमेरिका और यूरोप जैसे प्रमुख बाजारों में इस दौरान छुट्टियों का समय होता है। लेकिन तीसरी तिमाही के नतीजों में आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) पर प्रबंधन की टिप्पणियों पर बारीकी से नजर रखी जाएगी, खास तौर पर यह देखा जाएगा कि क्या एआई-आधारित मांग सौदे में बदल रहे हैं और इससे आय आ रही है या नहीं।
बाजार एआई रणनीति पर प्रबंधन की टिप्पणी के इंतजार में रहेगा क्योंकि अधिकांश फर्में अब अपनी योजनाओं पर तेजी से आगे बढ़ रही हैं। टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने पहले ही दो अधिग्रहणों और डेटा सेंटर में अपनी शुरुआत की घोषणा कर दी है। विप्रो ने हर्मन के डीटीएस व्यवसाय का अधिग्रहण किया है वहीं कोफोर्ज ने एनकोरा का अधिग्रहण किया और अन्य कंपनियां भी ऐसा कर सकती हैं।
मोतीलाल ओसवाल की एक शोध रिपोर्ट में कहा गया है, ‘ईकोसिस्टम स्तर पर ओपनएआई और क्लाउड जैसे प्रमुख एलएलएम, एसआई के साथ संरचित चैनल पार्टनरशिप खोल रहे हैं, जिससे पता चलता है कि एआई सेवा औपचारिक रूप लेना शुरू कर रही है। हमें उम्मीद है कि इसमें अगले 6 महीनों में तेजी आएगी जिससे एआई सेवाओं की मांग बढ़ेगी।’
इसके अलावा ग्राहकों के बजट रुझान, एच1-बी वीजा पर निर्भरता और प्रभाव तथा गैर-जरूरी खर्च पर अपडेट का भी बेसब्री से इंतजार करेगा। ब्लूमबर्ग के अनुमान के अनुसार शीर्ष छह आईटी कंपनियों की आय वृद्धि 1 से 4 फीसदी की सीमा में रहने का अनुमान है।
बीएनपी पारिबा ने पिछले महीने एक नोट में लिखा था, ‘छुट्टियों वाले सीजन में प्रवेश करते ही नवंबर में सौदे मिलने की रफ्तार और कम हो गई। सौदों की घोषणाएं यूरोप में केंद्रित थीं।’ आईटी फर्म एक्सेंचर के हालिया परिणामों में इसका संकेत दिया गया था। कंपनी ने अपनी पहली तिमाही में 5 फीसदी आय वृद्धि दर्ज की। इसके बावजूद उसने अपनी आय का अनुमान नहीं बढ़ाया।
अनअर्थइनसाइट्स का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में भारतीय आईटी उद्योग में 3 से 5 फीसदी वृद्धि की उम्मीद है, जिससे इस क्षेत्र को 290 अरब डॉलर के आंकड़े को पार करने में मदद मिलेगी।
अनअर्थइनसाइट्स के संस्थापक और सीईओ गौरव वासु ने कहा, ‘मंदी की आशंका, रोजगार बाजार में नरमी और अमेरिकी अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता को देखते हुए ग्राहक गैर-जरूरी आईटी खर्च और डिजिटल बदलाव परियोजनाओं को टाल रहे हैं।’
उन्होंने यह भी कहा है कि अमेरिकी वीजा शुल्क बढ़ने या नियुक्ति कानून के साथ स्थानीयकरण को बढ़ावा देने से वित्त वर्ष 2027 में आईटी सेवा क्षेत्र में 1 से -1 फीसदी तक की गिरावट आ सकती है। आईटी कंपनियों को मार्जिन और मुनाफा में सबसे बड़ा लाभ रुपये के नरमी से होगा। रुपया 2025 में डॉलर के मुकाबले 4.7 फीसदी गिर गया है और पिछले महीने एक समय 91 के स्तर को पार कर गया था। हालांकि विश्लेषकों को उम्मीद है कि वेतन वृद्धि और विलय और अधिग्रहण के कारण अधिकांश लाभ समाप्त हो जाएंगे।