एआई इम्पैक्ट समिट में भारतीय उद्योग जगत के दिग्गज जिस एक स्पष्ट थीम पर सहमत हुए हैं, वह यह है कि भारत का एआई मोमेंट मॉडल निर्माण में कामयाबी से कम, बल्कि इस बात से ज्यादा तय होगा कि टेक्नॉलजी को अर्थव्यवस्था में कितने असरदार तरीके से शामिल किया जाता है।
इन्फोसिस के चेयरमैन नंदन नीलेकणि ने एंथ्रोपिक के सीईओ डारियो अमोदेई के साथ एआई इम्पैक्ट समिट में चर्चा के दौरान कहा, ‘बुनियादी मॉडल जो कर रहे हैं वह विकास की गति है, लेकिन हमने जो सीखा है वह यह है कि टेक्नॉलजी का प्रसार एक अलग खेल है। आप एक अरब तक टेक्नॉलजी कैसे पहुंचाते हैं।’
विप्रो के कार्यकारी चेयरमैन रिशद प्रेमजी ने कहा कि एआई में भारत की प्रतिस्पर्धी बढ़त आकार के बजाय नियोजन पर निर्भर करेगी। उन्होंने कहा कि देश का फायदा ऐसे टैलेंट को विकसित करने में है जो एआई को कॉन्टेक्स्ट और जजमेंट के साथ इस्तेमाल कर सके और यह इंजीनियरों से आगे बढ़कर हेल्थकेयर, छोटे बिजनेस और प्रमुख परिचालन जैसे क्षेत्रों तक फैल सके। एआई को एक रूटीन टेक्नॉलजी चक्र के बजाय एक ढांचागत बदलाव बताते हुए एचसीएल टेक की अध्यक्ष रोशनी नादर मल्होत्रा ने इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी से वैल्यू क्रिएशन और जिम्मेदारी से नियोजन पर ज्यादा ध्यान देने की जरूरत बताई। उन्होंने जोर दिया कि एआई के दौर में असली फर्क सोच और गवर्नेंस की स्पष्टता से होगा।
इस बीच, सुनील भारती मित्तल ने मौजूदा बदलाव के बुनियादी स्वरूप पर जोर दिया और एआई को ‘कॉग्निशन का डिजिटाइजेशन’ बताया जो अर्थव्यवस्था के हर क्षेत्र को ताकत प्रदान करेगा।