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वैश्विक सीईओ का एआई अपनाने, कौशल और बुनियादी ढांचे पर जोर

एआई इम्पैक्ट समिट में पिचाई, ऑल्टमैन, स्मिथ, अमोदेई और वांग ने कहा- एआई उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए बड़ा अवसर, लेकिन जरूरी है इंफ्रास्ट्रक्चर, निवेश और जिम्मेदार गवर्नेंस

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 20, 2026 | 9:16 AM IST

एआई इम्पैक्ट समिट के चौथे दिन वैश्विक प्रौद्योगिकी दिग्गजों का एक समूह एक साथ आया, जिन्होंने आशावाद और तात्कालिकता के बीच एक संतुलित दृष्टिकोण अपनाते हुए आर्टिफिशल इंटेलिजेंस को आर्थिक रफ्तार के लिहाज एक पीढ़ी में एक बार मिलने वाले मौके के रूप में पेश किया (विशेष रूप से उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए) और कहा कि यह ऐसा अवसर है जिसके लिए बुनियादी ढांचे, निवेश और गवर्नेंस पर सोच-समझकर निर्णय लेने की आवश्यकता होगी।

गूगल के सीईओ सुंदर पिचाई ने मौजूदा क्षण को काफी प्रगति का मुहाने के रूप में वर्णित किया, जिसमें एआई विभिन्न देशों को पारंपरिक कमियों को दूर करने में मदद करने में सक्षम है, लेकिन साथ ही उन्होंने चेतावनी भी दी कि जिम्मेदार और सहयोगात्मक विकास के बिना ऐसे परिणाम न तो स्वचालित हैं और न ही गारंटीकृत।

ओपनएआई के सीईओ और सह-संस्थापक सैम ऑल्टमैन का मानना है कि विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र के रूप में भारत की अनूठी स्थिति न केवल एआई के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है बल्कि इसके विकास पथ को सक्रिय रूप से निर्धारित करने में भी सहायक है। उन्होंने यह भी कहा कि कुछ ही वर्षों में सुपर इंटेलिजेंस का प्रारंभिक स्वरूप सामने आ सकता है।

संरचनात्मक तैयारी की आवश्यकता पर जोर देते हुए ब्रैड स्मिथ ने बुनियादी ढांचे को बढ़ाने, सार्वजनिक और निजी पूंजी जुटाने और वैश्विक दक्षिण के लिए समावेशी, बहुभाषी एआई सिस्टम बनाने पर केंद्रित तीन आयामी दृष्टिकोण का आह्वान किया।
अधिक महत्वाकांक्षी आर्थिक दृष्टिकोण अपनाते हुए डारियो अमोदेई ने भारत की तकनीकी गहराई और विकास क्षमता को एक दुर्लभ संयोजन के रूप में बताया, जो एआई-आधारित अर्थव्यवस्था में असाधारण लाभ दिला सकता है।

अमोदेई ने कहा, भारत दुनिया के उन चुनिंदा स्थानों में से एक है, जहां मुझे आश्चर्य होता है कि क्या 20 से 25 फीसदी की वृद्धि हो सकती है, जो दुनिया में अभूतपूर्व है। लेकिन मुझे लगता है कि यह सभी कारकों का बहुत ही सकारात्मक तस्वीर पेश करता है। मेटा के मुख्य एआई अधिकारी अलेक्जेंडर वांग ने एआई के निर्माण के लिए मूलभूत आवश्यकताओं की रूपरेखा प्रस्तुत की और वैश्विक एआई पारिस्थितिकी तंत्र में भारत की बढ़ती भूमिका पर प्रकाश डाला।

First Published : February 20, 2026 | 9:16 AM IST