facebookmetapixel
Vodafone Idea Share: 50% टूट सकता है शेयर, ब्रोकरेज ने चेताया; AGR मामले में नहीं मिली ज्यादा राहत2026 में 1,00,000 के पार जाएगा सेंसेक्स ? एक्सपर्ट्स और चार्ट ये दे रहे संकेतसिगरेट पर एडिशनल एक्साइज ड्यूटी, 10% तक टूट ITC और गोडफ्रे फिलिप्स के शेयर; 1 फरवरी से लागू होंगे नियमहोटलों को एयरलाइंस की तरह अपनाना चाहिए डायनेमिक प्राइसिंग मॉडल: दीक्षा सूरीRBI की वित्तीय स्थिरता रिपोर्ट, क्रिप्टो पर सतर्कता; CBDC को बढ़ावाउभरते आर्थिक दबाव के बीच भारतीय परिवारों का ऋण बढ़ा, पांच साल के औसत से ऊपरनया साल 2026 लाया बड़े नीतिगत बदलाव, कर सुधार और नई आर्थिक व्यवस्थाएंसरकार ने 4,531 करोड़ रुपये की बाजार पहुंच समर्थन योजना शुरू कीअनिश्चित माहौल में सतर्कता नहीं, साहस से ही आगे बढ़ा जा सकता है: टाटा चेयरमैनपुरानी EV की कीमत को लेकर चिंता होगी कम, कंपनियां ला रही बायबैक गारंटी

देश में डेटा भंडारण पर कंपनियों में मतभेद

Last Updated- December 11, 2022 | 9:13 PM IST

प्रस्तावित डेटा सुरक्षा विधेयक में डेटा स्थानीयकरण के विवादित मुद्दे पर रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड और पेटीएम जैसी घरेलू कंपनियों और गूगल, मेटा, डिज्नी प्लस हॉटस्टार और पेपाल जैसी वैश्विक तकनीकी एवं मीडिया कंपनियों के बीच गंभीर मतभेद सामने आए हैं।
इस मुद्दे पर चर्चा के लिए इंटरनेट ऐंड मोबाइल एसोसिएशन ऑफ इंडिया (आईएएमएआई) की सार्वजनिक नीति समिति की बुधवार को बैठक हुई। इसमें स्थानीय स्तर पर डेटा भंडारित करने की पक्षधर घरेलू कंपनियों ने कहा कि जेपीसी का आदेश सख्त नहीं है क्योंकि वह आवश्यक बुनियादी ढांचे की स्थापना के लिए दो साल का पर्याप्त समय दे चुकी है। उन्होंने इस बात पर चिंता जताई कि सदस्य राष्ट्रीय सुरक्षा को हल्के में ले रहे हैं और वे उससे सहमत नहीं हैं। देसी कंपनियों ने यह भी कहा कि डेटा के स्थानीयकरण का चीन एक अच्छा उदाहरण है, जहां अभी तक कोई प्रतिकूल असर नजर नहीं आया है। पेटीएम ने तर्क दिया कि अनुपालन का बोझ बढ़ सकता है लेकिन अगर कंपनियां भारत में कारोबार करना चाहती हैं तो उन्हें उनका पालन करना चाहिए। इसका यह भी मानना है कि भुगतान क्षेत्र में बड़े असर का कोई अनुभवजन्य सबूत नहीं है।    
रिलांयस और पेटीएम दोनों ने इस मुद्दे पर कोई टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि वैश्विक कंपनियों ने इस कदम का विरोध किया है। एक ऑनलाइन सर्च इंजन कंपनी ने कहा कि भारतीय अंतरराष्ट्रीय आर्थिक संबंध अनुसंधान परिषद (इक्रियर) और कट्स इंटरनैशनल जैसी प्रतिष्ठित संस्थाओं के अनुसंधानों में भी यह बात सामने आई है कि सीमा पार डेटा प्रवाह से वास्तविक सामाजिक-आर्थिक लाभ होते हैं। उसका कहना है कि डेटा के प्रवाह से विभिन्न क्षेत्रों में नवोन्मेष और स्टार्टअप को बढ़ावा मिलेगा
वैश्विक कंपनियों ने यह भी तर्क दिया है कि इस कदम के सामाजिक-आर्थिक नतीजे सामने आएंगे और इसका द्विपक्षीय व्यापार समझौतों पर भी असर पड़ सकता है। इस चर्चा में हिस्सा लेने वाली एक वैश्विक कंपनी के वरिष्ठ कार्याधिकारी ने कहा, ‘इसे अभी परिभाषित नहीं किया गया है कि अहम निजी डेटा क्या है, जिसे भारत में भंडारित किया जाना चाहिए। अहम निजी डेटा पर परिभाषा इतनी व्यापक है कि एक अपलोडेड फोटो भी इसके दायरे में आ सकती है।’ कुछ लोग बीच के रास्ते का सुझाव देते हैं। उनका कहना है कि संवेदनशील सूचनाओं को भारत में भंडारित किया जाना चाहिए और अन्य डेटा के स्थानांतरण को मंजूरी दी जानी चाहिए। एक मीडिया कंपनी ने कहा कि अगर ऐसे प्रतिबंध सार्क देशों में लागू किए गए तो दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी।
हालांकि आईएएमएआई ने अपने पहले राय दी थी कि विधेयक में स्थानीय स्तर पर डेटा भंडारित करने की शर्तें शामिल नहीं की जाएं और इसने आपराधिक जुर्मानों को हटाने की मांग की थी। एसोसिएशन ने जेपीसी द्वारा विधेयक में गैर निजी आंकड़े शामिल करने पर आपत्ति जताई। इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा गैर निजी डेटा नियंत्रण पर ढांचा विकसित करने के लिए गठित विशेषज्ञ समिति ने ऐसा नहीं किए जाने की सिफारिश की थी।
अन्य भागीदारों ने राष्ट्रीय सुरक्षा का मुद्दा उठा रहीं घरेलू कंपनियों पर सवाल उठाए हैं। एक प्रमुख वैश्विक तकनीकी कंपनी के सीईओ ने कहा, ‘राष्ट्रीय सुरक्षा सरकार से जुड़ा मुद्दा है। इसके लिए निजी कंपनियों से कहना अनुचित है।’

First Published - February 17, 2022 | 10:51 PM IST

संबंधित पोस्ट