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आईटी इकाइयों को है विशेष कोष की दरकार

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Last Updated- December 10, 2022 | 2:01 AM IST

उड़ीसा में सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) इकाइयों ने राज्य सरकार से 50 करोड़ रुपये की रकम से एक विशेष संयुक्त कोष बनाए जाने का अनुरोध किया है।
कन्फेडरेशन ऑफ इन्फोर्मेशन टेक्नोलॉजी एंटरप्राइजेज (सीआईटीई), उड़ीसा के एक अधिकारी ने कहा, ‘राज्य में आईटी एसएमई मंदी से प्रभावित हुए हैं। पिछले तीन महीनों में इन एसएमई को उनके ग्राहकों से ठेके नहीं मिले हैं। राज्य सरकार को न्यूनतम 50 करोड़ रुपये की राशि से आईटी एसएमई के लिए एक विशेष संयुक्त कोष बनाए जाने की जरूरत है।
अधिकारी का कहना है कि विशेष संयुक्त कोष के अलावा उड़ीसा के आईटी विभाग को आईटी क्षेत्र में मौजूदा एसएमई और नए उद्यमियों की जरूरतें पूरी करने के लिए एक नई आईसीटी (सूचना एवं संचार प्रौद्योगिकी) नीति बनाने की जरूरत है। अधिकारी ने कहा कि नई आईसीटी नीति आंध्र प्रदेश और पश्चिम बंगाल जैसे पड़ोसी राज्यों की श्रेष्ठ आईटी कार्य प्रणालियों की तर्ज पर तैयार की जानी चाहिए।
अधिकारी ने बताया कि स्थानीय इकाइयों को परेशानी-मुक्त भूमि अधिग्रहण के अलावा नीति में यह भी सुनिश्चित करना चाहिए कि इकाइयों को ब्याज छूट और वैट छूट मिलनी चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘राज्य के आईटी विभाग को यह भी सुनिश्चित करने की जरूरत है कि विभिन्न ई-गवनर्स परियोजनाओं के कार्यान्वयन में ठेकेदारों को स्थानीय इकाइयों के साथ करार के लिए आगे आना चाहिए।’
उड़ीसा सरकार में उद्योग विभाग के निदेशक हेमंत शर्मा ने कहा, ‘यहां ज्यादातर आईटी इकाइयां एसएमई हैं और इन इकाइयों के लिए पर्याप्त बुनियादी ढांचे का पूरी तरह अभाव है। उड़ीसा कम्प्यूटर एप्लीकेशन सेंटर और उड़ीसा इंडस्ट्रियल इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन जैसी सरकारी एजेंसियों को इन लघु एवं मझोली इकाइयों के लिए रियायती दरों पर जगह मुहैया करानी चाहिए।’
स्थानीय आईटी इकाइयों के लिए पूंजीगत खर्च पर वैट छूट के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि ये इकाइयां इस मुद्दे को राज्य वैट सलाहकार परिषद के समक्ष उठा सकती हैं।

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First Published - February 23, 2009 | 9:48 PM IST

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