उद्योग के साथ बैठक में बीमा नियामक ने कंपनियों से अपने ग्राहकों का ई-बीमा खाता (ई-आईए) खोलने का अनुरोध किया है। यह बीमा पॉलिसियों के डिमटीरियलाइजेशन की दिशा में पहले कदम के रूप में काम करेगा। पॉलिसियों को बेचने, सेवाएं देने और दावों के निपटान के लिए नियामक ‘बीमा सुगम’ नाम से एक परिष्कृत प्लेटफॉर्म विकसित करने को भी इच्छुक है।
ई-आईए ग्राहकों द्वारा खरीदी गई सभी बीमा पॉलिसियों के लिए रिपॉजिटरी के रूप में काम करेगा। नियामक बीमा पॉलिसियों के डिमटीरियलाइजेशन पर बीमा उद्योग के साथ चर्चा कर रहा है, जिससे ग्राहकों की सुविधा में और बढ़ोतरी हो सके। भारतीय बीमा नियामक एवं विकास प्राधिकरण (आईआरडीएआई) ने जीवन और गैर जीवन बीमा कंपनियों के साथ इस सप्ताह इस मसले पर चर्चा की है और इस मसले पर उनके विचार मांगे हैं। डिमटीरियलाइजेशन का मतलब सभी भौतिक दस्तावेजों को ऑनलाइन प्रारूप में तब्दील करने से है। इसकी पहल नियामक ने कुछ साल पहले की थी, लेकिन परिचालन संबंधी चुनौतियों के कारण इसे मूर्त रूप नहीं दिया जा सका। एजिस फेडरल लाइफ इंश्योरेंस के एमडी और सीईओ विगनेश शहाणे ने कहा, ‘नियामक ने डिमटीरियलाइजेशन के मसले पर उद्योग के विचार आमंत्रित किए हैं। आईआरडीएआई के अधिकारियों ने आज उद्योग से मुलाकात की और इस सुविधा के लाभों के बारे में बताया। बहरहाल उन्होंने इसे अनिवार्य नहीं किया है।’
शहाणे ने कहा, ‘विचार यह है कि बीमा रिपॉजिटरी के रूप में हर नए ग्राहक को एक ई-इंश्योरेंस खाता (ई-आईए) दिया जाए, साथ ही 12 महीनों में मौजूदा ग्राहकों को भी इस व्यवस्था में शामिल किया जाए। ई-आईए खातों में आईआरडीएआई को व्यापक लाभ नजर आ रहा है। इससे नियामक सहित सभी हिस्सेदारों को व्यापक लाभ होगा। आईआरडीएआई एक परिष्कृत पोर्टल बनाने पर भी विचार कर रहा है, जहां ग्राहक बीमा पॉलिसी खरीद सकेंगे और अपने दावे का निपटान कर सकेंगे। यह सभी हिस्सेदारों के लिए उपयोगी होगा।’
बीमा सुगम एपीआई इंटरफेस के साथ प्लग ऐंड प्ले सॉल्यूशन होगा। आईआरडीएआई के प्रमुख ने पिछले महीने एक संबोधन में इसे बदलाव में अहम भूमिका निभाने वाला करार दिया था।