प्रमुख ब्याज दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं करके भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने इंतजार करो और देखो की नीति अपनाई है।
रिजर्व बैंक ने बाजार में तरलता बनाए रखने के लिए पहले ही कई कदम उठाए हैं, जिसका परिणाम आने वाले दिनों में देखने को मिलेगा।
भारतीय रिजर्व बैंक ने भी मान लिया है कि भारत में वैश्विक मंदी का असर है। महंगाई पर नियंत्रण करने की कोशिश एक बेहतर प्रयास है।’
हर्ष गोयनका, अध्यक्ष, आरपीजी इंटरप्राइजेज
‘मार्च तक महंगाई दर घटकर 3 फीसदी होने की उम्मीद है। अगर दरों में कटौती होती , तो बाजार का विश्वास लौट जाता और स्थिति बेहतर होती।
भारतीय रिजर्व बैंक और सरकार ने पिछले दिनों जिस तरह के मौद्रिक कदम उठाए थे, उसे अगर बरकरार रखा जाता, तो कुछ बेहतर की उम्मीद की जा सकती थी।
हालांकि बैंकों की विशेष पुनर्भुगतान सुविधाओं का विस्तार 30 सितंबर तक करने का फैसला स्वागतयोग्य है। ऐसा एसएलआर मानदंडों में ढ़ील देकर म्युचुअल फंड, गैर बैंकिंग वित्त कंपनियों और आवास वित्त कंपनियों की धन जरूरत पूरी करने के लिए किया गया है।’ फिक्की
‘अभी के माहौल में सबसे ज्यादा प्रभाव छोटे उद्योगों पर पडा है। लेकिन रिजर्व बैंक की इस मौद्रिक नीति से उसमें सुधार की संभावना कम हो गई है।’ सीआईआई
‘कंपनियों को आसान ब्याज दरों पर रुपये उपलब्ध कराना समय की मांग है। ऐसे में प्रमुख ब्याज दरों में कटौती होने से इसे हासिल कर पाना मुश्किल हो गया है।’ एसोचैम