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Budget 2026 MSME सेक्टर के लिए गेम चेंजर रहा? जानें इसमें ऐसा क्या है और इसपर एक्सपर्ट क्या सोचते हैं

सरकार ने दावा किया है कि बजट 2026 में MSME सेक्टर के लिए कई बड़े प्रावधान किये गए हैं जिसका सीधा फायदा सेक्टर को मिलेगा। आइए जानते हैं कि इसपर एक्सपर्ट क्या सोचते हैं

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ऋषभ राज   
Last Updated- February 06, 2026 | 8:44 PM IST

केंद्रीय बजट 2026 ने MSME सेक्टर के लिए नई उम्मीद जगाई है। छोटे और मझोले कारोबार अब कैश फ्लो से लेकर कंप्लायंस तक नए तरीके से काम कर सकेंगे। एक्सपर्ट्स इसे सिर्फ राहत नहीं, बल्कि एक स्ट्रक्चरल बदलाव मान रहे हैं। ड्यूटी डिफरमेंट, ऑटो-क्लियरेंस और डिजिटल टचपॉइंट जैसे कदम छोटे उद्यमियों की जिंदगी आसान करेंगे। एक्सपोर्ट, फाइनेंस और TDS में भी बदलाव उनके लिए फायदे का सौदा लाएंगे। टेक्सटाइल, महिला उद्यमियों और लेबर-इंटेंसिव सेक्टरों पर खास ध्यान से यह बजट MSMEs को मजबूत आधार देने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकता है।

एक्सिस बैंक और गोदरेज कैपिटल जैसे बड़े संस्थानों के एक्सपर्ट्स बता रहे हैं कि यह बजट MSMEs के लिए पैसा आसानी से मिलने और भरोसे पर आधारित कंप्लायंस की दिशा में एक बड़ा कदम रहा।

ड्यूटी डिफरमेंट और ऑटो-क्लियरेंस से कैश फ्लो सुधरेगा

एक्सिस बैंक के प्रेसिडेंट और हेड (मिड-कार्पोरेट्स और मीडियम एंटरप्राइजेस ग्रुप) प्रशांत टी.एस. के मुताबिक, डिफर्ड ड्यूटी पेमेंट और ऑटोमेटेड कस्टम क्लियरेंस जैसे कदम MSMEs की लिक्विडिटी पर सीधा असर डालेंगे।

उनका कहना है कि ड्यूटी को पहले चुकाने की मजबूरी खत्म होने से MSMEs का वर्किंग कैपिटल फ्री होगा और शॉर्ट-टर्म उधारी पर निर्भरता कम होगी। वहीं, ऑटो-क्लियरेंस से क्लीयरेंस में लगने वाला समय घटेगा, जिससे इन्वेंट्री होल्डिंग कॉस्ट और ब्याज का बोझ भी कम होगा।

प्रशांत ने कहा, “खासकर आयात पर निर्भर MSMEs के लिए ये सुधार कैश-फ्लो साइकिल को ज्यादा आसान  बनाएंगे, खर्चों की बेहतर प्लानिंग संभव होगी और कम मार्जिन वाले सेक्टरों पर दबाव घटेगा।”

सिंगल डिजिटल टचपॉइंट से कंप्लायंस होगा आसान

प्रशांत टी.एस. का मानना है कि सिंगल डिजिटल टचपॉइंट सिस्टम MSMEs के लिए एक बेहद अहम सुधार है। अभी MSMEs को अलग-अलग सरकारी प्लेटफॉर्म पर बार-बार जानकारी देनी पड़ती है, जिससे समय और संसाधन दोनों खर्च होते हैं।

वो कहते हैं कि एकीकृत डिजिटल सिस्टम से बार-बार एक ही जानकारी भरने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे गलतियां कम होंगी और काम जल्दी निपटेगा। इससे उद्यमियों को कागजी झंझट से राहत मिलेगी और वे अपने बिजनेस पर ज्यादा ध्यान दे पाएंगे। इसे ‘ईज ऑफ डूइंग बिजनेस’ की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

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प्रोडक्ट-स्पेसिफिक टैरिफ लाइन से MSME एक्सपोर्ट को फायदा

बजट में प्रोडक्ट-स्पेसिफिक टैरिफ लाइनों पर दिया गया जोर MSME एक्सपोर्टर्स के लिए अच्छी खबर है। एक्सपर्ट्स का कहना है कि इससे कस्टम क्लासिफिकेशन साफ होगा और अनावश्यक विवाद कम होंगे।

प्रशांत मानते हैं कि जब चीजें ज्यादा स्पष्ट होंगी तो क्लीयरेंस तेजी से होगा, ड्यूटी सही लगेगी और एक्सपोर्ट की कीमत तय करना भी आसान होगा। छोटे एक्सपोर्टर्स के लिए यह खास तौर पर जरूरी है, क्योंकि ड्यूटी का सीधा असर उनके मुनाफे और बिजनेस बढ़ाने की क्षमता पर पड़ता है।

कम TDS और सरल नियमों से लेबर-इंटेंसिव MSMEs को राहत

प्रशांत के मुताबिक, बजट 2026 में TDS को सरल बनाने और कम करने के प्रस्तावों को MSMEs के लिए बड़ी राहत माना जा रहा है। इससे पैसा कटकर अटकने के बजाय सीधे बिजनेस में लगा रहेगा और रिफंड के लंबे झंझट से भी निजात मिलेगी।

मैन्युफैक्चरिंग, टेक्सटाइल और लॉजिस्टिक्स जैसे ज्यादा मजदूरों वाले सेक्टरों में इससे कैश मैनेजमेंट बेहतर होगा, नई भर्तियों को लेकर भरोसा बढ़ेगा और बिना अतिरिक्त कंप्लायंस बोझ के फॉर्मल रोजगार को बढ़ावा मिलेगा।

पेनल्टी की जगह फीस से ट्रस्ट-बेस्ड कंप्लायंस को बढ़ावा

बजट में पेनल्टी की जगह फीस आधारित सिस्टम लाने को एक बड़े सोच के बदलाव के तौर पर देखा जा रहा है। प्रशांत के मुताबिक, ज्यादातर MSME मामलों में गलती जानबूझकर नहीं होती, बल्कि प्रक्रिया की जटिलता की वजह से हो जाती है।

फीस आधारित व्यवस्था से डर कम होता है, लोग खुद से नियमों का पालन करने के लिए आगे आते हैं और MSME सेक्टर को औपचारिक बनाने में मदद मिलती है। इससे यह भी साफ होता है कि सरकार अब सख्त निगरानी करने वाली नहीं, बल्कि सहयोग करने वाली भूमिका में है।

TReDS और MSME फंड से वर्किंग कैपिटल को मिलेगा सहारा

गोदरेज कैपिटल के MD & CEO मनीष शाह ने बजट 2026 को MSMEs और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर के लिए ‘प्रोग्रेसिव’ करार दिया है। उनके अनुसार, TReDS प्लेटफॉर्म को प्राइसिंग बेंचमार्क और सेटलमेंट प्लेटफॉर्म के तौर पर मजबूत करना छोटे कारोबारों की सालों पुरानी वर्किंग कैपिटल की समस्या पर सीधा समाधान है।

साथ ही, MSME ग्रोथ फंड और बढ़ाए गए आत्मनिर्भर भारत फंड (Self Reliant India Fund) से MSMEs को सिर्फ पूंजी ही नहीं मिलेगी, बल्कि बिजनेस बढ़ाने और विस्तार के नए अवसर भी खुलेंगे।

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टेक्सटाइल और महिला उद्यमियों पर खास फोकस

मनीष कहते हैं कि बजट में नेशनल फाइबर स्कीम और टेक्सटाइल विस्तार योजना को पारंपरिक उद्योगों को आधुनिक बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है। इससे पूरी वैल्यू चेन मजबूत होगी और लंबे समय में प्रतिस्पर्धा भी बढ़ेगी।

वहीं, She-Marts जैसी पहल महिला उद्यमियों पर फोकस करती है। मनीष के मुताबिक, यह कदम महिलाओं के नेतृत्व वाले कारोबारों को पहचान देने, उनकी भागीदारी बढ़ाने और उन्हें आर्थिक रूप से मजबूत बनाने का साफ संकेत है।

लिक्विडिटी से लेकर लॉन्ग-टर्म ग्रोथ तक मजबूत आधार

दोनों एक्सपर्ट का मानना है कि कुल मिलाकर, बजट 2026 में MSMEs से जुड़े सुधार कैश फ्लो बेहतर करने, संस्थानों को मजबूत बनाने और लंबे समय तक टिकाऊ ग्रोथ को सपोर्ट करने पर फोकस है। अगर ये सुधार जमीन पर सही ढंग से लागू हुए, तो MSME सेक्टर भारत की आर्थिक तरक्की का और ज्यादा मजबूत इंजन बन सकता है।

First Published : February 6, 2026 | 6:05 PM IST