भारत के 1,446 करोड़ रुपये के ग्लूकागॉन लाइक पेप्टाइड (जीएलपी-1) दवा बाजार को बड़ी बढ़त मिलने जा रही है। वजन घटाने और मधुमेह की दवा सेमाग्लूटाइड का पेटेंट खत्म होते ही इसके कम से कम 15 जेनेरिक संस्करण बाजार में आ चुके हैं। बीते शनिवार को कई बड़ी दवा कंपनियों ने अपनी जेनेरिक दवाइयां बाजार में उतारीं जिसके चलते दवा की कीमतों में औसतन 70 फीसदी से 90 फीसदी तक की कमी आई है।
जीएलपी-1 एगोनिस्ट दवाएं मधुमेह नियंत्रित करने, पेट भरे होने का एहसास कराने और वजन घटाने में मदद करती हैं। ये खास तौर पर टाइप-2 डायबिटीज (मधुमेह) और मोटापे के मरीजों के लिए उपयोगी होती हैं। हफ्ते में एक बार इंजेक्शन के तौर पर ली जाने वाली यह दवा भारत में वजन घटाने के लिए वीगॉवी नाम से (10,850 रुपये से 16,400 रुपये प्रतिमाह) और मधुमेह के लिए ऑजेंपिक (8,800 से 11,175 रुपये प्रति माह तक) नाम से उपलब्ध थी।
अब ग्लेनमार्क फार्मास्यूटिकल्स की जेनेरिक दवा 1,300 रुपये और अल्केम लैबोरेटरीज की दवा 1,800 रुपये प्रति माह में उपलब्ध है जो पेटेंटशुदा दवाओं की तुलना में क्रमश: 85 फीसदी और 79 फीसदी तक सस्ती है। यह दवाएं अलग-अलग रूप में उपलब्ध हैं, जिनमें दोबारा इस्तेमाल किए जाने वाले पेन, खुराक आधारित शीशी और टैबलेट शामिल हैं।
तीन कंपनियों, सन फार्मा, जायडस लाइफसाइंसेज और अल्केम ने मधुमेह और वजन नियंत्रण दोनों के लिए जेनेरिक सेमाग्लूटाइड पेश किया है।सन फार्मा ने वजन नियंत्रण के लिए ‘नोवेलट्रीट’ को पांच अलग-अलग खुराक में पेश किया है, जिसकी अनुमानित मासिक कीमत 3,600 से 8,000 रुपये के बीच है। वहीं मधुमेह के लिए सेमैट्रिनिटी को दो खुराक में 3,000 से 5,200 रुपये प्रतिमाह की कीमत में लाया गया है।
जायडस ने नियामक को जानकारी देते हुए कहा है कि कंपनी ने अपने पेन और दोबारा इस्तेमाल होने वाले पेन संस्करण पेश किए हैं जिनकी औसत मासिक लागत करीब 2,200 रुपये है। दूसरी तरफ डॉ. रेड्डीज लैबोरेटरीज (डीआरएल) और यूएसवी ने डायबिटीज के लिए इंजेक्शन वाले पेन की घोषणा की है जिसकी मासिक लागत 4,200 रुपये है। अहमदाबाद की कंपनी टॉरेंट फार्मा ने भी इंजेक्शन संस्करण के साथ ही सेमाग्लूटाइड टैबलेट पेश की है जिसकी कीमत 3,999 रुपये प्रतिमाह है।
आने वाले हफ्तों में कई और दवा कंपनियां भी अपने जेनेरिक सेमाग्लूटाइड संस्करण लाने की तैयारी में हैं, जिससे मधुमेह और मोटापे कम करने वाली दवाओं के बाजार में प्रतिस्पर्धा और बढ़ेगी साथ ही मरीजों को सस्ती दवाएं मिल सकेंगी।