हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉर्प (एचडीएफसी) के चेयरमैन दीपक पारेख ने आज कहा कि भारत की वृहद आर्थिक बुनियादी धारणा मजबूत है और रिकवरी हो रही है, लेकिन कर्ज में कमजोर वृद्धि प्रमुख चिंता बनी हुई है।
एचडीएफसी की 44वीं सालाना आम बैठक को संबोधित करते हुए पारेख ने कहा, ‘दूसरी लहर का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर उसी तरह दिख रहा है, जैसा वित्त वर्ष 21 में था, जब वित्त वर्ष की पहली छमाही कमजोर थी और दूसरी छमाही उल्लेखनीय रूप से मजबूत थी।’ बहरहाल कुल मिलाकर वृहद आर्थिक वातावरण के बारे में उन्होंने कहा, ‘प्रमुख चुनौती बनी हुई है, क्योंकि वायरस को लेकर अनुमान नहीं लगाया जा सकता। दुनिया अभी भी संक्रमण की वापसी को लेकर आशंकित है। इस तरह से आर्थिक रिकवरी असमान राह पर बनी रहेगी।’ पारेख ने उम्मीद जताई कि महामारी की तीसरी लहर, दूसरी लहर की तरह गंभीर नहीं होगी क्योंकि ज्यादा लोगों को टीके लग चुके होंगे। उन्होंने कहा, ‘हम उम्मीद करते हैं कि भारत में ज्यादा से ज्यादा लोगों का टीकाकरण हो जाएगा। ज्यादा टीकाकरण अहम है।’
भारत के पक्ष में दो चीजें काम कर रही हैं। विदेशी मुद्रा भंडार और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का प्रवाह रिकॉर्ड उच्च स्तर पर है, कृषि वृद्धि दर मजबूर रहने की उम्मीद है और और खाद्यान्न उत्पादन 30.5 करोड़ टन रहने की उम्मीद है। पारेख ने कहा कि रिजर्व बैंक का समावेशी रुख और सरकार की ओर से कोविड संबंधी दबाव कम करने की कवायदों से भी रिकवरी में मदद मिलेगी। शेयरधारकों के सवालों का जवाब देते हुए पारेख ने कहा कि मिस्त्री लंबा विस्तार नहीं चाहते। मिस्त्री को लेकर पारेख ने कहा, ‘हम उन्हें 10 साल दे सकते हैं, लेकिन वह 3 साल भी नहीं चाहते थे। बोर्ड ने 3 साल का कार्य विस्तार देने के लिए उनके ऊपर दबाव डाला।’
पारेख ने कहा कि एचडीएफसी, एचडीएफसी अर्गो और इसके बीमा कारोबार में अपने निवेश को लेकर बहुत खुश है लेकिन अर्गो के मामले में वह रिजर्व बैंक के निर्देशों के मुताबिक अपनी हिस्सेदारी 50.6 प्रतिशत से घटाकर 50 प्रतिशत करेगा। कुछ सहायक इकाइयों की सूचीबद्धता भी होनी है। पारेख ने यह भी कहा कि एचडीएफसी के लिए यह संभव नहीं है कि वह होल्डिंग कंपनी बनाए। उन्होंने कहा, ‘अब हम होल्डिंग कंपनी हैं, कौन हमें पूंजी देगा? परिवार द्वारा चलाई जा रही कंपनी होल्डिंग कंपनी में कितनी भी राशि डाल सकती है, जब उनकी सहायक इकाई को धन की जरूरत होती है। अगर एचडीएफसी अपने को दो कंपनियों, हाउसिंग वर्टिकल और एक होल्डिंग कंपनी में बांट ले तो ऐसे में जब हमारी सभी सहायक इकाइयों को धन की जरूरत होगी तो हम कहां से धन जुटाएंगे?’