भारत में 20 वर्षों के परिचालन और 2 अरब डॉलर से ज्यादा के निवेश के बाद अब हुआवेई टेक्नोलॉजिज के लिए आगे की राह धूमिल नहीं लग रही थी।
सरकार द्वारा चीनी कंपनियों के लिए 5जी परीक्षण के दरवाजे बंद किए जाने से हुआवेई अब दूरसंचार उपकरणों की बिक्री के सबसे बड़े आगामी व्यावसायिक अवसर से वंचित हो सकती है।
उद्योग के अनुमानों के अनुसार, दूरसंचार कंपनियों (भारती एयरटेल, रिलायंस जियो, वोडाफोन आइडिया और बीएसएनएल समेत) द्वारा अगले पांच साल में 5जी दूरसंचार उपकरण खरीद पर 10 अरब डॉलर से ज्यादा निवेश किए जाने की संभावना है।
विश्लेषकों का कहना है कि 2016-20 के बीच, दूरसंचार कंपनियों ने अपने 4जी रेडियो एक्सेस नेटवर्कों को तैयार करने के लिए 19 अरब डॉलर (प्रबंधन सेवाओं पर 4 अरब डॉलर को छोड़कर) से ज्यादा पूंजीगत खर्च किया। जहां आधी 4जी नेटवर्क बाजार भागीदारी सैमसंग (जिसने रिलायंस जियो नेटवर्क खड़ा किया) के पास थी, वहीं एरिक्सन और नोकिया जैसी यूरोपीय कंपनियों की 30 प्रतिशत से ज्यादा भागीदारी थी। शेष पर चीनी कंपनियों का दबदबा था और इनमें हुआवेई मुख्य रूप से शामिल रही है। अब हुआवेई की बाजार भागीदारी आगामी वर्षों में काफी घट जाएगी, क्योंकि वह 5जी प्रतिस्पर्धा में भागीदारी से बाहर हो गई है, जिस पर वह पिछले कुछ वर्षों से ध्यान केंद्रित कर रही थी।
हुआवेई ने किसी तरह की प्रतिक्रिया देने से इनकार कर दिया है। यह सही है कि कंपनी अपने 4जी नेटवर्कों को अपग्रेड करने और विस्तार के लिए ऑपरेटरों के साथ कार्य बरकरार रखेगी, लेकिन यह एक कमजोर पड़ता व्यवसाय रह जाएगा। इस व्यवसाय में भी कुछ दूरसंचार कंपनियां हुआवेई से अलग हैं। पिछले साल, एयरटेल ने आठ सर्किलों में अपना 4जी नेटवर्क बढ़ाने के लिए एरिक्सन के साथ अनुबंध नवीकृत किया। हालांकि कुछ का मानना है कि इसकी वजह शायद यह थी कि एयरटेल मूल्य निर्धारण गेम में कूदने को इच्छुक नहीं थी।
यह भी स्पष्ट है कि हुआवेई समेत चीनी कंपनियां सरकार के स्वामित्व वाली बीएसएनएल/ एमटीएनएल से 4जी के लिए आगामी 8,000 करोड़ रुपये के अनुबंध में भागीदार बनने में सक्षम नहीं होंगी। कंपनी घरेलू सिस्टम इंटिग्रेटरों को अनुबंध देने की संभावना तलाश रही है।