प्राकृतिक संसाधनों पर अपनी निर्भरता घटाने के प्रयास में अल्ट्राटेक सीमेंट और हिंडाल्को इंडस्ट्रीज ने समझौता किया है जिसके तहत एल्युमीनियम उत्पादक सात राज्यों में मौजूद अल्ट्राटेक के संयंत्रों को सालाना 12 लाख टन रेड मड की आपूर्ति करेगी। रेड मड को बॉक्साइट अपशेष के तौर पर भी जाना जाता है। रेड मड की आपूर्ति अल्ट्राटेक के 14 संयंत्रों को की जाएगी।
रेड मड एल्युमिना के औद्योगिक उत्पादन में पैदा होने वाला एक अपशिष्ट उत्पाद है जिसका इस्तेमाल मुख्य तौर पर एल्युमीनियम धातु के निर्माण में किया जाता है। हालांकि इस धातु को सीमेंट उद्योग, सड़क निर्माण और और अयस्क के स्रोत के तौर पर भी इस्तेमाल किया जाता है।
कंपनी द्वारा जारी विज्ञप्ति में कहा गया है कि हिंडाल्को अपने तीनों रिफाइनरियों में 100 प्रतिशत रेड मड इस्तेमाल वाली दुनिया की पहली कंपनी है। हिंडाल्को की एल्युमिना रिफाइनरियां मौजूदा समय में हर महीने सीमेंट कंपनियों को 250,000 टन बॉक्साइट अवशेष की आपूर्ति कर रही हैं, जिससे बॉक्साइट अवशेष के बड़े पैमाने पर वाणिज्यिक इस्तेमाल में मदद मिल रही है। इसके साथ, हिंडाल्को ने वित्त वर्ष 2021 में 25 लाख टन बॉक्साइट अवशेष इस्तेमाल का लक्ष्य रखा है।
हिंडाल्को के प्रबंध निदेशक सतीश पई के हवाले से कहा गया है, ‘हिंडाल्को ने निर्माण उद्योग के लिए हाई-ग्रेड उत्पाद विकसित करने के लिए सीमेंट कंपनियों के साथ काम किया है। हमारा मकसद अपने सभी परिचालन में जीरो-वेस्ट एल्युमिना उत्पादन हासिल करना है।’ वैश्विक रूप से 16 करोड़ टन रेड मड का सालाना उत्पादन होता है और इसे भूमि के बड़े हिस्से पर रखा जाता है, जो एक गंभीर औद्योगिक चुनौती है।