सरकारी कंपनियों आरईसी, एनटीपीसी और इंडियन रेलवे फाइनैंस कॉर्पोरेशन (आईआरएफसी) ने अपनी चल रही परियोजनाओं और पुराने कर्ज खत्म करने के लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार से धन जुटाने की योजना बनाई हैं।
बैंकरों का कहना है कि एनटीपीसी ने जनवरी के अंत तक 75 करोड़ डॉलर, आरईसी ने करीब 1.1 अरब डॉलर और आईआरएफसी ने 1 अरब डॉलर जुटाने की योजना बनाई है, क्योंकि विदेशी ऋणदाताओं ने इन इकाइयों को कर्ज देने में रुचि दिखाई है। कम ब्याज दरें और भारत की योजनाओं की अच्छी साख की वजह से विदेशी कर्जदाता भारतीय कंपनियों में धन लगाने में रुचि दिखा रहे हैं।
निजी क्षेत्र की कंपनियां भी धन जुटाने के लिए अंतरराष्ट्रीय बॉन्ड बाजारों में संभावना तलाश रही हैं। आरआईएल पहली कंपनी है, जिसने अंतरराष्ट्रीय निवेशकों को बॉन्ड बेचकर 4 अरब डॉलर जुटाए हैं। हाल के सप्ताह में रिन्यू पावर और जेएसडब्ल्यू इन्फ्रास्ट्रक्चर ने भी धन जुटाया है।
बैंक उम्मीद कर रहे हैं कि आने वाले महीनों में वेदांत, जिंदल स्टील, अदाणी ग्रीन एनर्जी और मुंबई एयरपोर्ट सहित कई और कंपनियां अंतराष्ट्रीय निवेशकों से धन जुटाएंगी। एक बैंकर ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, ‘हम उम्मीद कर रहे हैं कि कैलेंडर वर्ष 2022 की पहली तिमाही में भारत की कंपनियां अंतराष्ट्रीय निवेशकों से 10 अरब डॉलर और साल के अंत तक 25 से 30 अरब डॉलर जुटाएंगी।’
भारत की शीर्ष कंपनियां वैश्विक बाजारों से ऋण की संभावनाएं तलाश रही हैं, जिससे भारत से ज्यादा लागत के ऋण की जगह उन्हें सस्ता ऋण मिल सके। बैंकरों ने कहा कि चीन की प्रॉपर्टी दिग्गज एवरग्रेनेड ग्रुप द्वारा चूक किए जाने के कारण भारत की कंपनियों में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ी है, क्योंकि इन्हें कम जोखिम वाली माना जा रहा है।
एक और बैंकर ने नाम न दिए जाने की शर्त पर कहा, ‘शीर्ष रेटिंग वाली भारतीय कंपनियों, खासकर भारत सरकार की कंपनियों की ओर से किसी तरह की चूक की संभावना कम है, इसलिए कुछ अंतरराष्ट्रीय बैंक इस सेक्टर में निवेश करने को इच्छुक हैं।’