कमजोर बाजार में देश की सबसे बड़ी कृषि रसायन कंपनी यूपीएल का शेयर गुरुवार को 2.4 प्रतिशत चढ़ा। विभिन्नता और टिकाऊ (डीऐंडएस) समाधानों पर ध्यान, परिचालन लाभ मार्जिन पथमें सुधार और ऋण में कमी वे प्रमुख कारण हैं, जिनसे ब्रोकरेजों ने हाल ही में इसके शेयर पर अपनी ‘खरीद’ की रेटिंग को दोहराया है।
कंपनी के लिए वृद्धि के प्रमुख संचालकों में से एक है उत्पाद या कारोबार मिश्रण में डीऐंडएस से आने वाले राजस्व के एक बड़े हिस्से, जिसमें मूल्य वर्धित उत्पाद और जैव-समाधान भी शामिल हैं, के साथ बदलाव। कंपनी का इरादा वित्त वर्ष 2020-21 (वित्त वर्ष 21) के दौरान डीऐंडएस की 29 प्रतिशत हिस्सेदारी को बढ़ाकर वित्त वर्ष 26 तक 50 प्रतिशत करना। इससे उसके ब्रांडेड जेनेरिक पोर्टफोलियो में उस अवधि के दौरान उसकी बिक्री 70 प्रतिशत से घटकर आधी रह जाएगी।
भले ही एमके रिसर्च द्वारा वित्त वर्ष 22-25 के दौरान कंपनी की समेकित राजस्व वृद्धि आठ प्रतिशत आंकी गई है, लेकिन इस अवधि में डीऐंडएस पोर्टफोलियो में 19 प्रतिशत की जोरदार वृद्धि की उम्मीद है। इस वृद्धि के संचालकों में जैव-समाधान (प्राकृतिक उत्पाद) शामिल होंगे, जो पारंपरिक कीटनाशकों का विकल्प पेश करते हैं, पर्यावरण पर कम प्रभाव डालते हैं, अधिक मार्जिन प्राप्त कराते हैं और संपूर्ण बाजार की तुलना में तेज दर से बढ़ रहे हैं।
कंपनी द्वारा विभिन्न उत्पादों पर ध्यान केंद्रित करने का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि नवोन्मेष (नई शुरुआतों से होने वाली बिक्री) का कुल कारोबार वित्त वर्ष 2014 मे तीन प्रतिशत से बढ़कर वित्त वर्ष 21 में 21 प्रतिशत हो चुका है और अगले पांच वर्षों में बढ़कर 30 प्रतिशत होने उम्मीद है।
अमेरिका स्थित एफएमसी कॉरपोरेशन और जापान की मेजी जैसी फसल संरक्षण की वैश्विक दिग्गज कंपनियों के साथ अंतरराष्ट्रीय सहयोग वृद्धि का एक अन्य संचालक है, क्योंकि यह फर्म को भारत और वैश्विक बाजारों में नए उत्पादों के निर्माण और विपणन करने में सक्षम करत है। कंपनी ने चालू वित्त वर्ष की पहली छमाही को 20.6 प्रतिशत मार्जिन के साथ पूरा किया है।