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बैंकिंग क्षेत्र के विशेषज्ञों का कहना है कि माल एवं सेवा कर (जीएसटी) से जुड़े कथित उल्लंघनों के मामले में फिनो पेमेंट्स बैंक के एमडी और सीईओ ऋषि गुप्ता की गिरफ्तारी का असर बैंक के प्रस्तावित स्मॉल फाइनैंस बैंक (एसएफबी) में रूपांतरण पर पड़ने की संभावना नहीं है।
फिनो अब तक का एकमात्र पेमेंट बैंक है, जिसने स्माल फाइनैंस बैंक के लिए आवेदन किया था। पिछले साल दिसंबर में रिजर्व बैंक ने इस बदलाव के लिए सैद्धांतिक मंजूरी दे दी थी। फिनो के पास एसएफबी में बदलने के लिए 18 महीने का वक्त है।
फिनो द्वारा एसएफबी लाइसेंस के लिए आवेदन करने के लगभग दो साल बाद यह सैद्धांतिक मंजूरी मिली। एसएफबी बनने के बाद फिनो व्यक्तियों और कंपनियों को ऋण देने में सक्षम होगा।
शुक्रवार को सीजीएसटी और एसजीएसटी अधिनियम, 2017 की धारा 132 (1) (ए) और 132 (1) (आई) के प्रावधानों के तहत गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद मुख्य वित्त अधिकारी केतन मर्चेंट को बोर्ड ने संगठन का प्रमुख नियुक्त किया। वह गुप्ता की अनुस्थिति में संगठन का रोज का कामकाज देखेंगे।
भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के एक पूर्व अधिकारी ने नाम न सार्वजनिक करने की शर्त पर कहा, ‘सामान्यतया कर से जुड़े मसलों के कारण रिजर्व बैंक फिनो के एसएफबी में बदलने की अनुमति देने के मसले पर पुनर्विचार नहीं करेगा, जब तक कि कुछ गंभीर मसला सामने नहीं आता।’
धारा 132(1)(ए) उन मामलों से संबंधित है जहां कोई व्यक्ति कर से बचने के इरादे से बिना इनवॉइस जारी किए वस्तुओं या सेवाओं की आपूर्ति करता है, या गलत या झूठा इनवॉइस जारी करता है। धारा 132(1)(आई) अधिनियम के तहत निर्दिष्ट किसी भी अपराध को करने या उकसाने के प्रयासों को शामिल किया गया है। कर की देनदारी की राशि के मुताबिक धारा 132 के तहत सजा अलग-अलग होती है, जिसमें उच्च सीमा पर 5 साल तक की कैद के साथ जुर्माना भी शामिल है। कुछ अपराध संज्ञेय और गैर-जमानती हैं, जो गड़बड़ी की धनराशि के मुताबिक होती है। पेमेंट्स बैक ने गुप्ता का समर्थन किया है। उसका तर्क है कि जीएसटी का कथित उल्लंघन कुछ प्रोग्राम मैनेजरों की एक जांच से जुड़ा है, जिनका संबंध कई बैंकों से है, जिसमें फिनो पेमेंट्स बैंक भी शामिल है। बैंक ने साफ किया है कि गुप्ता या बैंक इन प्रोग्राम मैनेजरों की कार्रवाई में भूमिका नहीं है।
नियोस्ट्रैट एडवाइजर्स एलएलपी के संस्थापक अबीजर दीवानजी के अनुसार, अगर स्मॉल फाइनैंस बैंक में प्रस्तावित रूपांतरण पर कोई असर पड़ता है, तो वह कंज्यूमरऑन-बोर्डिंग के क्षेत्र में होने की संभावना है, जो नियामक जांच के दायरे में आ सकता है।
दीवानजी ने कहा, ‘मुझे फिनो के पेमेंट बैंक से एसएफबी में परिवर्तन के लिए आरबीआई की मंजूरी प्रभावित होने का कोई तत्काल कारण नहीं दिखता है। ऋषि गुप्ता की गिरफ्तारी कुछ कड़ी कार्रवाई लगती है। हालांकि इस घटनाक्रम से तथ्यों को स्थापित करने के लिए अधिक विस्तृत जांच शुरू हो सकती है, लेकिन इसका नियामक अनुमोदन प्रक्रिया पर कोई असर नहीं होना चाहिए। जब तक कोई प्रत्यक्ष प्रभाव या शासन में चूक सामने नहीं आती है, तब तक रिजर्व बैंक गुप्त की एमडी और सीईओ के रूप में अगले 3 साल के कार्यकाल के लिए पुनर्नियुक्ति के लिए अपनी मंजूरी पर पुनर्विचार नहीं करेगा।’
रिजर्व बैंक ने जनवरी में 2 मई, 2026 से प्रभावी अगले तीन वर्षों के लिए एमडी और सीईओ के रूप में गुप्ता का कार्यकाल बढ़ा दिया गया था। गुप्ता फिनो पे-टेक के संस्थापकों में से एक हैं, जो फिनो पेमेंट्स बैंक की होल्डिंग कंपनी है। वह 2007 में मुख्य परिचालन अधिकारी और मुख्य वित्तीय अधिकारी के रूप में समूह में शामिल हुए। बाद में मई 2017 तक फिनो पे-टेक के प्रबंध निदेशक और मुख्य कार्याधिकारी के रूप में कार्य किया। आरिन कैपिटल और मणिपाल ग्लोबल एजुकेशन सर्विसेज के अध्यक्ष मोहनदास पई ने जब एक्स पर गुप्ता की गिरफ्तारी को लेकर सवाल उठाया, तब वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने मामले को संज्ञान में लिया था।
पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिया (पीसीआई) ने भी वित्त मंत्री को गुप्ता की गिरफ्तारी पर ‘संस्थागत चिंता’ जताते हुए पत्र लिखा है। भुगतान निकाय ने कहा कि वह बहु-स्तरीय विनियमन की स्थिति में जवाबदेही निर्धारण से संबंधित कुछ व्यापक सिद्धांतों को रखना चाहता है।