Stock Market Closing Bell, Monday, March 2, 2026: एशियाई बाजारों में भारी गिरावट के बीच भारतीय शेयर बाजार हफ्ते के पहले ट्रेडिंग सेशन यानी सोमवार (2 मार्च) को बड़ी गिरावट में बंद हुए। ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से मिडिल ईस्ट क्षेत्र में कारोबार करने वाली कंपनियों के शेयरों में भारी बिकवाली हुई। कच्चे तेल की कीमतों में जोरदार तेजी ने निवेशकों को बिकवाली के लिए मजबूर कर दिया। एलएंडटी, रिलायंस और एचडीएफसी बैंक जैसे हैवीवेट शेयरों में बिकवाली ने बाजार को नीचे की तरफ धकेला। साथ ही डॉलर के मुकाबले रुपये में गिरावट से विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की।
ईरान और अमेरिका के बीच तनाव बढ़ने से बाजार में घबराहट देखी जा रही है। ईरान के सबसे बड़े नेता आयतोल्ला अली खामेनेई और कई बड़े अधिकारियों को अमेरिका और इजरायल की संयुक्त सैन्य कार्रवाई में मार दिया गया। बाजार के जानकारों का कहना है कि हालात आगे भी बिगड़ सकते हैं। इससे बाजार में चिंता बढ़ गई है।
तीस शेयरों वाला बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex) प्री-ओपन में 78,543.73 अंक तक गिर गया था। जबकि कारोबार के दौरान यह 1 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट में कारोबार करता रहा। अंत में 1048.34 अंक या 1.29 प्रतिशत की गिरावट लेकर 80,238.85 पर बंद हुआ।
इसी तरह, नैशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी-50 (Nifty-50) भी बड़ी गिरावट लेकर 24,659.25 पर खुला। कारोबार के दौरान 24,603 अंक तक फिसला। अंत में 312.95 अंक या 1.24 फीसदी गिरका 24,865 पर बंद हुआ।
जियोजित इन्वेस्टमेंट्स में रिसर्च हेड विनोद नायर ने कहा, ”मिडिल ईस्ट में बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव ने वैश्विक बाजारों को अस्थिर कर दिया है। ईरान के सुप्रीम लीडर की हत्या के बाद हालात और बिगड़ने की आशंका बढ़ गई है। कच्चे तेल की कीमतों में तेजी और रुपये की कमजोरी इस बात का संकेत है कि तेल सप्लाई में बाधा आ सकती है। इससे भारत में महंगाई का दबाव बढ़ सकता है, सरकारी वित्तीय स्थिति प्रभावित हो सकती है और एनर्जी व केमिकल आधारित सेक्टरों के मार्जिन पर दबाव पड़ सकता है।”
उन्होंने कहा, ”इंडिया वीआईएक्स में बढ़ोतरी दर्ज की गई है, जो बाजार में अनिश्चितता और जोखिम से बचने की प्रवृत्ति को दर्शाता है। निवेशक पारंपरिक सुरक्षित निवेश विकल्पों की ओर रुख कर रहे हैं और स्थिति स्पष्ट होने का इंतजार कर रहे हैं। कच्चे तेल की कीमतों में उछाल के बाद विदेशी संस्थागत निवेशकों की बिकवाली भी तेज हुई है।”
सेंसेक्स की कंपनियों में बीईएल, सन फार्मा और आईटीसी को छोड़कर सभी शेयर लाल निशान में रहे। इंडिगो और एलएन्डटी 5 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। अदाणी पोर्ट्स, मारुति, एशियन पेंट्स, बजाज फिनसर्व और रिलायंस प्रमुख रूप से गिरावट में रहे।
ब्रोडर मार्केट्स का प्रदर्शन प्रमुख इंडेक्स से कमजोर रहा। निफ्टी मिडकैप और निफ्टी स्मॉलकैप सूचकांक क्रमशः 1.58 प्रतिशत और 1.75 प्रतिशत की गिरावट के साथ बंद हुए। सेक्टर के लिहाज से निफ्टी ऑटो 2.20 प्रतिशत गिरकर सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला इंडेक्स रहा। वहीं निफ्टी मेटल 0.24 प्रतिशत की बढ़त के साथ बंद हुआ और सेक्टर इंडेक्स में बेहतर प्रदर्शन किया।
एशिया के शेयर बाजारों में सोमवार सुबह भारी गिरावट देखी गई। जापान का निक्केई 225 और दक्षिण कोरिया का कोस्पी इंडेक्स क्रमशः 2.7 प्रतिशत और 2.43 प्रतिशत तक गिर गए। अमेरिका के शेयर बाजार के फ्यूचर्स रविवार को 1 प्रतिशत से ज्यादा गिर गए। यह गिरावट तब आई जब अमेरिका और इजरायल ने ईरान पर हमला किया। एसएंडपी 500 और डाउ जोंस इंडस्ट्रियल एवरेज दोनों 1.11 प्रतिशत गिर गए। एशियाई कारोबार के दौरान डाउ जोंस और एसएंडपी 500 के फ्यूचर्स भी क्रमशः 0.6 प्रतिशत और 0.54 प्रतिशत नीचे कारोबार कर रहे थे।
कमोडिटी बाजार में कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ीं। सप्लाई वाले अहम इलाके में तनाव बढ़ने से चिंता बढ़ गई है। ब्रेंट कच्चे तेल की कीमत 13.76 प्रतिशत उछलकर 82.37 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। ब्लूमबर्ग के आंकड़ों के अनुसार, यह जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।
बाजार में बड़ी की वजह से निवेशकों को करीब 10 लाख करोड़ रुपये घट गया। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का मार्केट कैप घटकर 4,53,07,277 करोड़ रुपये रह गया। जबकि शुक्रवार को बाजार बंद होने के बाद यह 46,325,200 करोड़ रुपये था। इस तरह, निवेशकों को 10,17,923 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ है।
ल सप्लाई क्षेत्र में तनाव बढ़ने से ब्रेंट कच्चे तेल को लेकर चिंता बढ़ गई है। ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स 13.76 प्रतिशत उछलकर 82.37 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया। यह जनवरी 2025 के बाद का सबसे ऊंचा स्तर है।हॉर्मुज जलडमरूमध्य, जहां से दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल सप्लाई गुजरती है, बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव के बीच चर्चा का मुख्य केंद्र बन गया है। हालांकि अभी इस समुद्री रास्ते को बंद नहीं किया गया है। लेकिन हमले के डर से टैंकर दोनों ओर जमा हो रहे हैं। रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, कुछ जहाजों को बीमा मिलने में भी दिक्कत हो सकती है।