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CCIL का मामला फिर से चर्चाओं में, ईएसएमए से समाधान के लिए RBI सक्रिय

भारतीय रिजर्व बैंक और ईएसएमए के बीच सीसीआईएल समेत केंद्रीय समकक्षों की मान्यता और ईएमआईआर नियमों को लेकर फिर से बातचीत हो सकती है।

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मनोजित साहा   
सुब्रत पांडा   
Last Updated- March 02, 2026 | 8:20 AM IST

भारत की चिंताओं का पर्याप्त समाधान नहीं होने की स्थिति में भारतीय रिजर्व बैंक और यूरोपियन सिक्योरिटीज ऐंड मार्केट्स अथॉरिटी (ईएसएमए) के बीच हाल ही में हुए समझौते पर फिर से बातचीत हो सकती है। यह जानकारी सूत्रों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को दी।

भारत के केंद्रीय बैंक भारतीय रिजर्व बैंक और यूरोपीय संघ के वित्तीय बाजारों के नियामक व पर्यवेक्षक ईएसएमए ने इस जनवरी में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए थे। दरअसल, भारत-ईयू व्यापक समझौते के हिस्से के तहत रिजर्व बैंक और ईएसएमए के बीच समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर हुए थे। इसका ध्येय रिकग्नेशन ऑफ सेंट्रल काउंटरपार्टीज (सीसीपी) की मान्यता के लिए सहयोग और सूचना के आदान-प्रदान को सुविधाजनक बनाना था।

सूत्रों के अनुसार समझौता पत्र इस शर्त पर था कि यूरोपीय बाजार इन्फ्रास्ट्रक्चर रेगुलेशन (ईएमआईआर) के साथ समझौते को आगे बढ़ाने को लेकर होने वाली अगली वार्ता में भारतीय नियामक की चिंताओं का समाधान किया जाएगा।

इस समझौता पत्र का उद्देश्य रिजर्व बैंक और ईएसएमए के बीच लंबे समय से चले आ रहे गतिरोध को हल करना था। इसका कारण यह था कि ईएसएमए ने सीसीआईएल जैसे भारतीय केंद्रीय समकक्षों के बही खातों का ऑडिट करने की मांग की थी।

भारत के नजरिए से यूरोपीय संघ (ईयू) के नियामक की इस मांग को देश के कानून से परे (एक्सट्रा टेरिटोरियल) माना गया। दरअसल सीसीआईए न तो भारत के बाहर मौजूद है और न ही उसका कोई व्यवसाय है। लेकिन ईएसएमए यह शक्ति चाहता था ताकि भारत में काम करने वाले यूरोपीय बैंक ईएमआईआर मानदंडों का पालन करें।

हालांकि अगर ईएमआईआर मान्यता के लिए सीसीआईएल आवेदन करता और संबंध स्थापित होते तो यह ईएमआईआर नियमों के तहत होते। ऐसे में इसे भारत के कानून से परे (एक्सट्रा टेरिटोरियल) माना गया था। यह भारत के दृष्टिकोण से महत्त्वपूर्ण था कि इस मुद्दे के समाधान के लिए प्रयास हों।  इस उद्देश्य के लिए ईएमआईआर मानदंडों को संशोधित करने की जरूरत है, जब भी इसकी समीक्षा हो।

सूत्रों ने कहा कि भारतीय नियामक को उम्मीद है कि ईएमआईआर से अगली बातचीत में चिंताओं का समाधान हो जाएगा। यदि आगामी ईएमआईआर से आगामी वार्ता में ये चिंताओं समुचित ढंग से हल नहीं हुई तो ईएसएमए के साथ समझौता ज्ञापन पर फिर से बातचीत करने की जरूरत हो सकती है।
सीसीआईएल के अलावा भारत में पांच अन्य केंद्रीय समकक्ष हैं – तीन बाजार नियामक सेबी से विनियमित और दो अंतराष्ट्रीय वित्तीय सेवा केंद्र प्राधिकरण से विनियमित। ये अभी ईएसएमए के साथ ऐसे समझौता ज्ञापन पर चर्चा कर रहे हैं।

ईएसएमए ने प्रेस विज्ञप्ति में था कि यह समझौता पत्र सीसीआईएल को ईएमआईआर की मान्यता के लिए फिर से आवेदन करने के लिए कहता है।

सीसीआईएल भारत में स्थापित सीसीपी है और यह ईएमआईआर से पर्यवेक्षित है। रिजर्व बैंक के अनुसार यह समझौता पत्र ईएसएमए के प्रारूप की निर्भरता और नियामकीय गतिविधियों के लिए ढांचा स्थापति करता है। इसके अलावा ईयू की वित्तीय स्थिरता की रक्षा करता है।  इस मामले में गतिरोध की शुरुआत अक्टूबर 2022 से हुई। उस समय ईएसएमए ने कहा था कि वह क्लियरिंग कॉपोरेशन ऑफ इंडिया (सीसीआईएल) सहित छह केंद्रीय समकक्ष की मान्यता रद्द कर देगा। ये छह केंद्रीय समकक्ष सरकारी बॉन्ड और ओवरनाइट इंडेक्स्ड स्वैप के लिए ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की मेजबानी करते हैं। यह निर्णय रिजर्व बैंक द्वारा सीसीआईएल के ऑडिट और निरीक्षण का अधिकार विदेशी संस्थाओं को देने से इनकार करने के बाद लिया गया।

First Published : March 2, 2026 | 8:20 AM IST