इस्पात उत्पादों पर लगाए गए निर्यात कर के कारण भारतीय इस्पात कंपनियां अपने यूरोपीय ऑर्डरों को रद्द करने के लिए मजबूर हो सकती हैं। जिंदल स्टील ऐंड पावर के प्रबंध निदेशक वीआर शर्मा ने यह बात कही। उन्होंने कहा कि रातोरात लिए गए इस फैसले से इस्पात कंपनियों को नुकसान उठाना पड़ सकता है।
भारत ने शनिवार को आठ इस्पात उत्पादों पर 15 फीसदी निर्यात कर लगाने की घोषणा की थी। यह घोषणा ऐसे समय में की गई है जब इस्पात कंपनियां घरेलू बाजार में कमजोर मांग की भरपाई यूरोपीय बाजार में अपनी बाजार हिस्सेदारी बढ़ाकर पूरा करना चाहती हैं। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण यूरोपीय बाजार में इस्पात की आपूर्ति काफी प्रभावित हुई जिसका फायदा भारतीय कंपनियों को मिल सकता है।
शर्मा ने कहा, ‘उन्हें हमें कम से कम 2-3 महीने का समय देना चाहिए था। हमें इस महत्त्वपूर्ण नीति के बारे में कोई जानकारी नहीं थी।’ उन्होंने कहा कि भारतीय इस्पात विनिर्माताओं के पास करीब 20 लाख टन इस्पात के निर्यात ऑर्डर लंबित हैं जो अधिकतर यूरोप के लिए हैं। इसके लिए इस्पात बंदरगाहों पर अथवा उत्पादन के विभिन्न चरणों में है। उन्होंने कहा, ‘इससे संभवत: फोर्स मेजर को बल मिलेगा। यहां ग्राहक ने कोई गलती नहीं की है और उनके साथ इस प्रकार का व्यवहार नहीं किया जाना चाहिए।’
रूस और यूक्रेन ने 2020 में 4.67 करोड़ टन इस्पात का निर्यात किया था। इनमें से अधिकांश निर्यात यूरोपीय संघ को किया गया था जो वल्र्ड स्टील एसोसिएशन के अनुसार दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा इस्पात आयातक है। शर्मा ने कहा कि सरकार के इस फैसले से उद्योग की लागत में करीब 30 करोड़ डॉलर की वृद्धि होगी। उन्होंने कहा, ‘केवल हमारे पास 2,60,000 टन इस्पात के ऑर्डर हैं। ये ऑर्डर उस समय के हैं जब निर्यात शूल्क शून्य था।’