विनिवेश से बढ़ सकता है सरकारी उपक्रमों का बाजार पूंजीकरण

Published by
बीएस संवाददाता
Last Updated- December 12, 2022 | 12:18 AM IST

सूचीबद्घ कंपनियों के कुल बाजार पूंजीकरण में सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (पीएसयू) की भागीदारी मौजूदा समय में 10 प्रतिशत के सर्वाधिक निचले स्तर पर है और सरकार के विनिवेश संबंधित प्रयासों से इसे मजबूती मिल सकती है।
पिछले सप्ताह सरकार ने एयर इंडिया की कमान टाटा संस को सौंपने की घोषणा की थी और यह वर्ष 2002-03 के बाद से पीएसयू क्षेत्र में भारत का पहला निजीकरण सौदा है। यह सौदा दिसंबर तक पूरा हो जाने की संभावना है।
इस सौदे से सोमवार को निफ्टी पीएसई से जुड़े कई पीएसयू के शेयरों में तेजी आई। एनएमडीसी और कोल इंडिया के शेयरों में 5.8 प्रतिशत और 4.4 प्रतिशत की तेजी आई।
इस साल के शुरू में अपने बजट में सरकार ने कहा था कि दो सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों और एक सामान्य बीमा कंपनी का वित्त वर्ष 2022 में निजीकरण किया जाएगा। सरकार ने एलआईसी के लिए शेयर बिक्री की भी योजना बनाई है और कई महत्वपूर्ण क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति सीमित करना चाहती है।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज की एक रिपोर्ट में कहा गया है, ‘एयर इंडिया बिक्री से अपने महत्वाकांक्षी निजीकरण/विनिवेश एजेंडे पर आगे बढऩे की सरकार की दिलचस्पी स्पष्ट हुई है।’
ब्रोकरेज का कहना है कि रणनीतिक विनिवेश के विभिन्न चरणों के तहत बीपीसीएल, पवन हंस, सेंट्रल इलेक्ट्रॉनिक, सलेम स्टील प्लांट, एससीआई, बीईएमएल, और नीलांचल इस्पात निगम के साथ चालू वित्त वर्ष में इस मोर्चे पर उत्साह बढऩे की संभावना है। सरकार आईडीबीआई बैंक, आरआईएनएल, कॉनकोर, एचएलएल लाइफकेयर, पीडीआईएल, और आईएमपीसीएल में विनिवेश के लिए भी संभावना तलाश रही है।
राजग-1 सरकार ने 9 वर्ष 1999 और 2003 के बीच पीएसयू कंपनियों का निजीकरण किया था, जिनमें मॉडर्न फूड इंडस्ट्रीज, बालको, हिंदुस्तान टेलीप्रिंटर्स, सीएमसी, इंडो बर्मा पेट्रोलियम कंपनी, वीएसएनएल, प्रदीप फॉस्फेट्स, हिंदुस्तान जिंक और आईपीसीएल शामिल हैं। सरकार ने आईटीडीसी की 19 परिसंपत्तियों और होटल कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया की तीन परिसंपत्तियों में भी हिस्सेदारी बेची थी।
सूचीबद्घ पीएसयू में पिछले महीने अच्छी तेजी आई है और विनिवेश प्रयास इन कंपनियों के भविष्य के लिए शुभ संकेत हैं।
एचडीएफसी सिक्योरिटीज में रिटेल रिसर्च प्रमुख दीपक जसानी ने कहा, ‘पीएसयू में विनिवेश की उम्मीद से तेजी आई है और उन्हें जिंस चक्र में तेजी का लाभ मिल रहा है। यह तेज रफ्तार कुछ और समय तक बनी रह सकती है। यह देखना बाकी है कि कितने समय तक जिंस चक्र में तेजी बनी रहेगी, क्योंकि इसका मुद्रास्फीति पर प्रत्यक्ष रूप से प्रभाव पड़ा है और जिस वजह से दुनियाभर में केंद्रीय बैंक असहजता महसूस कर रहे हैं।’
कई पीएसयू तेल एवं गैस और धातु जैसी जिंसों के व्यवसाय से जुड़े हुए हैं। इनकी कीमतें पिछले कुछ महीनों में तेजी से चढ़ी हैं। वैश्विक कच्चे तेल की कीमत मौजूदा समय में 80 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है और इसमें और तेजी आने का अनुमान है। प्राकृतिक गैस कीमतें भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गई हैं।पीएसयू शेयरों को हमेशा से महत्वपूर्ण चयन के तौर पर देखा जाता रहा है और उन्हें मुख्य तौर पर सरकार के राजस्व लक्ष्यों को पूरा करने के लिए आकर्षक लाभांश देने के लिए जाना जाता है। आईडीबीआई कैपिटल की ताजा रिपोर्ट के अनुसार, उदाहरण के लिए, निफ्टी पीएसयू बैंक सूचकांक मौजूदा समय में 11.1 गुना के एक वर्षीय आगामी पीई मल्टीपल पर कारोबार कर रहा है, जो धातुओं को छोड़कर अन्य क्षेत्रों के मुकाबले कम है।
अबैकस ऐसेट मैनेजर के संस्थापक सुनील सिंघानिया ने निवेशकों को भेजी रिपोर्ट में कहा है, ‘पिछले कुछ महीनों में बाजारों में अच्छी तेजी आई है, क्योंकि उसे क्षेत्रीय बदलाव से भी मदद मिली है। हम यह देख रहे हैं कि पिछले कुछ वर्षों में कमजोर प्रदर्शन कर रहे क्षेत्र भी अब तेजी की राह पर बढ़ रहे हैं जिनमें पीएसयू और रियल एस्टेट सेक्टर भी शामिल है।’

First Published : October 12, 2021 | 11:30 PM IST