भारत में 10,000 रुपये से कम कीमत वाले मोबाइल फोन बाजार में फिलहाल चीन की कंपनियों का वर्चस्व है लेकिन 5जी के मामले में ऐसा संभवत: नहीं दिखेगा। सरकार इस मूल्य श्रेणी को घरेलू कंपनियों के लिए आरक्षित करने पर विचार कर रही है।
देसी कंपनियां दस हजार रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन बाजार में चीन की कंपनियों का सामना करने में विफल रही हैं। ऐसे में सरकार उन्हें प्रोत्साहित करना चाहती है। हालांकि दूरसंचार कंपनियों एवं अन्य लोगों का मानना है कि इससे देश में 10,000 रुपये से कम कीमत वाले सस्ते 5जी फोन तैयार करने की योजना प्रभावित हो सकती है।
बाजार हिस्सेदारी में बदलाव पर नजर रखने वाली तकनीकी विश्लेषण फर्म टेकआर्क के अनुसार, इस मूल्य दायरे में देसी कंपनियों की हिस्सेदारी 2015 में 66 फीसदी थी जो घटकर 2021 में महज 1 फीसदी रह गई।
समान अवधि में चीनी कंपनियों की हिस्सेदारी 12 फीसदी से बढ़कर 98 फीसदी हो गई। दिलचस्प है कि दक्षिण कोरिया एवं वियतनाम जैसे अन्य देशों के ब्रांड की हिस्सेदारी भी इस दौरान 22 फीसदी से घटकर महज 1 फीसदी रह गई। दस हजार रुपये से कम कीमत वाले स्मार्टफोन का बाजार मात्रात्मक बिक्री के लिहाज से काफी महत्त्वपूर्ण है क्योंकि कुल मात्रात्मक बिक्री में इसका योजदान करीब 38 फीसदी है। हालांकि मूल्य के लिहाज से कुल बिक्री में इसकी बाजार हिस्सेदारी कम है।
जाहिर तौर पर ‘देसी मोबाइल चैंपियन’ तैयार करने के लिए सरकार की मोबाइल उपकरणों पर उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन (पीएलआई) योजना के अच्छे परिणाम सामने नहीं आए हैं। महज छह देसी कंपनियां ही पीएलआई के तहत प्रोत्साहन हासिल करने के लिए आवश्यक पात्रता मानदंडों पर खरी उतरी हैं। इसलिए लावा, माइक्रोमैक्स, ऑप्टीमस जैसी कंपनियां अपने लक्ष्य को पूरा करने में समर्थ नहीं हैं। यही कारण है कि सरकार सस्ते फोन बाजार को घरेलू कंपनियों के लिए आरक्षित करने पर विचार कर रही है।
हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं है कि सरकार ऐसा कैसे करेगी। कुछ लोगों का कहना है कि भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) को चीन की कंपनियों पर करीबी नजर रखनी चाहिए कि कहीं वे अनुचित व्यापार प्रथाओं में लिप्त तो नहीं हैं। हाल में प्रवर्तन निदेशालय ने कर चोरी के आरोपों के आधार पर चीनी कंपनियों के दफ्तरों पर छापेमारी की है।
दूरसंचार ऑपरेटर और मोबाइल कारोबार से जुड़े लोग फिलहाल आश्वस्त नहीं हैं कि 10,000 रुपये से कम कीमत वाले 5जी स्मार्टफोन के बाजार को घरेलू कंपनियों के लिए आरक्षित करने से कोई खास फायदा होगा।
एक मोबाइल ऑपरेटर के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, ‘यदि आप 5जी ग्राहकों के प्रसार और वृद्धि पर गौर करेंगे तो आपको 10,000 रुपये के दायरे में सस्ते स्मार्टफोन की आवश्यकता महसूस होगी और केवल चीनी कंपनियां ही मूल्य के मोर्चे पर काम कर रही हैं। वे 5जी फोन के दाम को 13,000 रुपये तक पहले ही घटा चुकी हैं और उसे 10,000 रुपये के दायरे में लाने के लिए काम कर रही हैं। ऐसे में जरा बताएं कि कौन सी घरेलू कंपनी इसके लिए डिजाइन में निवेश कर रही है।’