कंपनी कानून बोर्ड (सीएलबी) ने बुधवार को सरकार को मायटास इन्फ्रा और मायटास प्रॉपर्टीज को नोटिस जारी करने का निर्देश दिया है।
सत्यम के पूर्व चेयरमैन बी रामलिंग राजू और उनका परिवार ही इन दोनों कंपनियों का मालिक है। सरकार ने इन कंपनियों के बोर्ड को भंग कर दिया, जिसके बाद इन्होंने सीएलबी का दरवाजा खटखटाया।
सीएलबी से जुड़े एक सूत्र ने कहा, ‘सीएलबी ने सरकार को याचिका की एक कॉपी के साथ याचिकाकर्ता को नोटिस भेजने का निर्देश दिया है।’ मंगलवार को सरकार ने सीएलबी से मायटास इन्फ्रा और मायटास प्रॉपर्टीज के बोर्ड को भंग करने का कहा था।
दूसरी ओर, सीएलबी का कहना है कि वह ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि इन दोनों कंपनियों ने एक हफ्ते पहले ही सरकार के ऐसे किसी भी कदम से बचने के लिए दरख्वास्त लगाई हुई है।
सीएलबी से जुड़े सूत्र के मुताबिक इन दोनों कंपनियों को 24 फरवरी को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा और उसके बाद सीएलबी की एक मुख्य बेंच ही इस मामले में फैसला सुनाएगी।
इस सूत्र का कहना है कि सत्यम का मामला कुछ अलग था, जिसमें कंपनी के मुखिया ने खुद ही धोखाधडी की बात स्वीकारी थी और उसी की बुनियाद पर सीएलबी ने अपनी कार्रवाई भी की लेकिन इस मामले में ऐसा नहीं है और इन कंपनियों का पक्ष सुनने के बाद ही इस मामले पर फैसला हो पाएगा।
हालांकि, इस सूत्र ने इस मामले में किसी भी तरह की संभावना से इनकार किया। उन्होंने कहा कि सीएलबी, सरकार की इन कंपनियों का बोर्ड भंग करने की बात पर मुहर लगा सकती है क्योंकि यह मामला देश में हुए अब तक के सबसे बड़े कारोबारी घोटाले से जुड़ा है।
धूमिल भविष्य
पहले ही सरकारी मार से बचने को अर्जी दे चुकी हैं राजू परिवार की कंपनियां
सत्यम का मामला था अलग, कंपनी के मुखिया ने खुद कबूली धोखाधड़ी
इन दोनों कंपनियों को दिया जाएगा अपना पक्ष रखने का मौका
सीएलबी की मुख्य बेंच सुनाएगी अपना फैसला