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दासगुप्ता चले वनवास

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Last Updated- December 10, 2022 | 1:52 AM IST

कुणाल दासगुप्ता मल्टी स्क्रीन मीडिया प्र्राइवेट लिमिटेड के पिछले 14 साल से मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) रह चुके हैं। मल्टी स्क्रीन मीडिया हिंदी के मनोरंजन चैनल सोनी का भी संचालन करती है।
दासगुप्ता जो 1995 में सोनी एंटरटेनमेंट टेलीविजन ज्वॉइन किया था। उनके नेतृत्व में सोनी पर  ‘इंडियन आइडल’ जैसे ब्लॉकबस्टर रियल्टी शो लाया गया था।
 
जस्सी जैसी कोई नहीं और सीआईडी ऐसे धारावाहिक रहे, जिन्होंने टेलीविजन इतिहास में अपना नया मुकाम हासिल किया और इस तरह कुणाल दासगुप्ता ने अपनी काबिलियत का लोहा मनवाया।
मालूम हो कि दासगुप्ता सोनी पिक्चर्स के पहले कर्मचारी थे, जब जापानी कंपनी सोनी पिक्चर्स टेलीविजन इंटरनेशनल और भारतीय प्रवर्तकों की ओर से संयुक्त उद्यम बनाया गया था। वर्ष 2007 में दासगुप्ता का कार्यकाल दो साल तक के लिए बढ़ा दिया गया। उन्हें जून 2009 तक सीईओ बनाने की घोषणा की गई।
वैसे दासगुप्ता के लिए विवाद से पाला पड़ना कोई नई बात नहीं है। 2002 में सोनी की ब्लॉकबस्टर मैरिज रियल्टी शो ‘शुभ विवाह’ के प्रसारण में भी विवाद खड़ा हो गया था। कुणाल दासगुप्ता की प्रारंभिक शिक्षा केंद्रीय विद्यालय में हुई।
वे 1966-70 तक केंद्रीय विद्यालय के छात्र रहे। उन्होंने बेंगुलुरु विश्वविद्यालय से 1979 में जीव विज्ञान में स्नातक किया। वे 1979-81 के दौरान भारतीय प्रबंधन संस्थान, कोलकाता के छात्र रहे। उन्होंने 1973-75 के दौरान भरतियार विश्वविद्यालय से एमबीए भी किया है।
मालूम हो कि दासगुप्ता ने उस समय इस्तीफा दिया, जब सोनी के इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के टीवी प्रसारण अधिकार को लेकर भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड (बीसीसीआई) के साथ विवाद जारी है। बीसीसीआई ने सोनी पर बिग टीवी के प्रसारण अधिकार को समाप्त करने के लिए 100 करोड़ रुपये हर्जाने के भुगतान करने का दबाव डाल रही है।
गौरतलब हो कि अनिल धीरूभाई अंबानी की कंपनी बिग टीवी को आईपीएल के ऑन ग्राउंड प्रायोजन का अधिकार मिला था। इस घटनाक्रम से जुड़े सूत्रों की मानें, तो सोनी बिग टीवी से ली गई ऑफर मूल्य से एक चौथाई कीमत पर यह अधिकारी एयरटेल डीटीएच के हाथों करार कर रही थी।
हालांकि इस बाबत रिलायंस एडीएजी के अधिकारियों का कहना है कि स्पॉनशरशिप खत्क करने का पहला अधिकार बिग टीवी को मिलना चाहिए। इसी बात को मुद्दा बनाकर बिग टीवी ने बीसीसीआई से शिकायत की। मामला तब और पेचीदा हो गया, जब एयरटेल ने यह अधिकार लेने से मना कर दिया।
इस हालात में सोनी की स्थिति सांप-छूछूंदर वाली हो गई। सोनी में 14 साल तक रहने का बाद उनका इस्तीफा देना किसी वनवास से कम नहीं है। अब देखना यह है कि उनकी नई मंजिल किस ओर रुख करती है।
उनकी जुबान से सुनें, तो उन्होंने अपने हिसाब से सोनी के लिए बहुत कुछ किया है। उन्होंने यह भी कहा है कि उनके नेतृत्व में सोनी नंबर वन की बुलंदी पर पहुंच गया।

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First Published - February 20, 2009 | 11:38 PM IST

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