facebookmetapixel
Advertisement
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर RSS ने दिया पहला बयान, कहा: घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कड़ी सजाEditorial: दिल्ली की नई EV नीति सही दिशा में, लेकिन अभी भी कई बड़े सुधार की जरूरतभारत को अपना AI मॉडल बनाने का जरूरत नहीं, मजबूत AI इकोसिस्टम पर दांव लगाना सही कदमहिमाचल में 2027 की चुनावी बिसात: खस्ताहाल खजाना और गुटबाजी के बीच सुक्खू सरकार की बढ़ी बेचैनीविदेशी निवेशकों से रुपये में लिया जाएगा रेगुलेटरी शुल्क, FPI और FVCI के लिए SEBI बदलने जा रहा है नियमकॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में आई जबरदस्त रौनक, भारतीय कंपनियों ने एक ही दिन में जुटाए ₹15,960 करोड़Nifty IT इंडेक्स 30% टूटा, फिर भी पैसिव फंड्स का एयूएम 23% बढ़कर ₹5,800 करोड़ के पार‘विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू म्युचुअल फंड बने शेयर बाजार की ढाल’, SEBI का बड़ा दावाअल नीनो और महंगे ईंधन की दोहरी मार: होटलों की कमाई पर मंडराया संकट, पानी की कमी ने बढ़ाई मुश्किलेंईरान युद्ध के बीच IPO बाजार में म्युचुअल फंडों का जलवा, कई सालों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हिस्सेदारी

‘जरूरत से ज्यादा स्पेक्ट्रम है कंपनियों के पास’

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 1:35 AM IST

देश की तीन बड़ी टेलीकॉम सेवा प्रदाता कंपनियां ने जरूरत से ज्यादा स्पेक्ट्रम ले रखा है। यह दूरसंचार मंत्रालय के दिशानिर्देशों के खिलाफ है, जिसके मुताबिक टेलीकॉम कंपनियों को मिले स्पेक्ट्रम का पूरा इस्तेमाल करना होता है।
दूसरी तरफ, भारतीय वायुसेना के लिए एक दूसरा संचार नेटवर्क इस साल जून तक तैयार हो जाएगा। भारत संचार निगम लि. (बीएसएनएल) इस नेटवर्क को तैयार कर रही है। 

दूरसंचार मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक 2जी स्पेक्ट्रम के आबंटन की जांच में जुटी केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) को पता लगा है कि तीन बड़ी सेवा प्रदाता कंपनियों के पास जरूरत से ज्यादा स्पेक्ट्रम है।
आयोग ने इस बात को सरकार के सामने भी रखा है। हालांकि, उन सेवा प्रदाता कंपनियों के नामों का खुलासा नहीं किया गया है। स्पेक्ट्रम के आबंटन के लिए अलग-अलग सर्किलों में अलग-अलग कायदे-कानून रख गए हैं। फिर भी एक मेट्रो सर्किल में किसी कंपनी को अगर 4.4 मेगाहाट्र्ज का स्पेक्ट्रम चाहिए, तो उसके पास कम से कम पांच लाख उपभोक्ता होने चाहिए।
आयोग की यह रिपोर्ट दूरसंचार विभाग की इस घोषणा के ठीक उल्ट है, जिसके मुताबिक स्पेक्ट्रम की कोई जमाखोरी नहीं है। आयोग ने इस बाबत दूरसंचार विभाग से भी सफाई मांगी है। सीवीसी ने स्पेक्ट्रम आबंटन और इस्तेमाल से जुड़े दस्तावेजों की मांग की है।
आयोग ने इससे पहले विभाग से मौजूदा सेवा प्रदाताओं को 2जी स्पेक्ट्रम के आबंटन के मुद्दे पर भी सफाई मांगी थी। बाद में कहा था कि वह विभाग के जबाव से संतुष्ट नहीं है। आयोग में उन तरीकों के बारे में जानकारी मांगी है, जिसके जरिये दूरसंचार विभाग आगे स्पेक्ट्रम आबंटन करने की योजना बना रही है।
दूसरी तरफ, सूत्रों का कहना है कि वायुसेना के लिए तैयार किए जा एक अलग नेटवर्क पर काम इस साल जून तक पूरा हो जाएगा। इस नेटवर्क को एएफनेट का नाम दिया गया है और मुल्क भर में मौजूद 162 जगहों को जोड़ेगा।
इसके तैयार हो जाने के बाद यह वायुसेना की ज्यादातर संचार जरूरतों को पूरा करेगी। इससे कारोबारी इस्तेमाल के लिए काफी स्पेक्ट्रम हासिल हो जाएगी। 

इस नेटवर्क को बनाने में बीएसएनएल ने पहले ही 500 करोड़ का निवेश कर चुकी है। सूत्रों के मुताबिक सेना और नौसेना के लिए भी अलग नेटवर्कों को बनाने का काम 2011 तक पूरी हो जाएगा।

Advertisement
First Published - February 18, 2009 | 11:13 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement