कच्चे माल की कीमतें अपने सर्वोच्च स्तरों से नीचे आती दिखी हैं मगर एफएमसीजी कंपनियों के मार्जिन पर कम से कम अगली तिमाही तक दबाव बना रह सकता है क्योंकि जिंसों के दाम पिछले साल के मुकाबले अब भी ऊंचे हैं।
उपभोक्ता कंपनियां अपने उत्पादों के दाम बढ़ाने का सिलसिला आगे भी जारी रख सकती हैं क्योंकि वे कीमतें धीरे-धीरे बढ़ा रही हैं और कच्चे माल की बढ़ी लागत का पूरा बोझ उन्होंने अभी तक ग्राहकों पर नहीं डाला है।
कच्चे पाम तेल के दाम काकीनाड़ा बंदरगाह पर अब भी 12 फीसदी ऊंचे बने हुए हैं जबकि कांडला बंदरगाह पर दाम 8.8 फीसदी अधिक हैं। एम-ग्रेड चीनी की कीमत कोल्टापुर में 7.2 फीसदी अधिक है और आरबीडी पाम तेल का दाम काकीनाड़ा बंदरगाह पर 9.8 फीसदी ऊपर चल रहा है।
फिलिप कैपिटल इंडिया के उपाध्यक्ष-शोध (उपभोक्ता एवं खुदरा क्षेत्र) विशाल गुटका ने कहा, ‘जिसों के दाम अपने उच्चतम स्तर से नीचे आए हैं लेकिन पिछले साल की तुलना में अब भी अधिक हैं और कंपनियों के मार्जिन पर कम से कम एक तिमाही तक इसका असर दिख सकता है। फसल की कटाई के बाद अक्टूबर से ग्रामीण उपभोक्ताओं के हाथों में पैसे आएंगे, उसके बाद ही मांग में तेजी आ सकती है।’
उन्होंने कहा कि उपभोक्ता कंपनियों के पास अब भी बढ़ी लागत वाला यानी महंगा माल पड़ा हुआ है, जो जुलाई तक ही खप पाएगा और कम कीमत का लाभ अगस्त से ही मिलना शुरू होगा। कंपनी का प्रदर्शन दूसरी तिमाही में पहली तिमाही से बेहतर रह सकता है। मगर पिछले साल की समान तिमाही के मुकाबले यह कमजोर रहेगा। हिंदुस्तान यूनिलीवर (एचयूएल) ने अपनी सालाना आम बैठक में निवेशकों को बताया था कि वह उत्पादों के दाम बढ़ाना जारी रखेगी क्योंकि मुद्रास्फीति उच्च स्तर पर बनी हुई है। एचयूएल के चेयरमैन नितिन परांजपे ने कंपनी के शेयरधारकों को बताया था कि मुद्रास्फीति के इस स्तर को देखते हुए कंपनी के लिए उत्पादों के दाम बढ़ाना जरूरी हो गया है। उन्होंने कहा था कि जरूरत पड़ने पर संयमित तरीके से दाम बढ़ाए जाते रहेंगे। कंपनी ने जनवरी-मार्च तिमाही के नतीजों के बाद निवेशकों को आगाह किया था कि अल्पावधि में कंपनी के मार्जिन में कमी आएगी।
हालांकि पारले प्रोडक्ट्स में कैटेगरी हेड मयंक शाह ने कहा कि जिंसों के दाम नरम हुए हैं, ऐसे में कंपनी आगे उत्पादों के दाम नहीं बढ़ाएगी। पारले ने इसी तिमाही में उत्पादों के दाम बढ़ाए थे। इमामी के प्रबंध निदेशक हर्ष वी अग्रवाल ने कहा कि उत्पादन लागत में कमी से कंपनी को राहत मिली है लेकिन दाम पर किसी तरह का निर्णय करने से पहले जिंसों की कीमतें स्थिर होने का इंतजार किया जाएगा। उन्होंने कहा, ‘ दाम में स्थिरता उद्योग के लिए अच्छी है। मांग बढ़ने और ग्राहकों के हाथों में ज्यादा पैसे होने से वे गैर-जरूरी चीजों पर खर्च कर सकते हैं।’