मुंबई में हमलों के बाद काउंटर-टेरोरिज्म बिजनेस में अवसरों को देखते हुए सरकार निजी व्यवसायों के लिए केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ) की ओर से मुहैया कराई गई सिक्युरिटी कंसल्टेंसी सेवा दरों को चौगुना करने पर विचार कर रही है।
निजी क्षेत्र के व्यवसाय को भुगतान आधारित सुरक्षा सेवा की संपूर्ण रेंज मुहैया कराने के लिए इस अर्द्धसैनिक बल को सक्षम बनाने के लिए संसद के इस सत्र में एक विधेयक के साथ यह प्रस्ताव तैयार किया गया।
गृह मंत्रालय के अधिकारियों ने बताया, ‘मुंबई हमलों के बाद निजी क्षेत्र की ओर से उनके परिसरों में सीआईएसएफ को तैनात किए जाने की लगातार मांग की जा रही है।’ उन्होंने यह भी कहा कि कई मीडिया घरानों, टेलीविजन चैनलों, मंदिर प्रबंधन, स्कूलों, निजी रिफाइनरियों और होटलों की ओर से इस बारे में हमसे संपर्क किया गया है।
अधिकारियों ने बताया कि दो भारतीय आईटी कंपनियों इन्फोसिस और विप्रो के अनुरोध के बाद संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (संप्रग) सरकार ने विधेयक का प्रारूप तैयार किया। सरकार ने प्रधानमंत्री आवास के लिए यह विधेयक तैयार किया जो आतंकवादी हमलों के लिए अधिक संवेदनशील है।
निजी क्षेत्र की एक प्रमुख रिफाइनरी ने भी इस मुद्दे पर सरकार का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है। सीआईएसएफ देश का एकमात्र कोस्ट-रीइम्बर्समेंट बल है। इसे सार्वजनिक क्षेत्र की सुरक्षा और प्रमुख राष्ट्रीय प्रतिष्ठानों और बाद में वीआईपी की सुरक्षा के लिए 1969 में विकसित किया गया था।
इस बल को 2002 में निजी व्यवसायों को कंसल्टेंसी सेवाएं मुहैया कराने के लिए अधिकृत किया गया। इसकी शुल्क रेंज 50,000 रुपये से 1.25 लाख रुपये है। वैसे यह शुल्क रेंज कंपनी के आकार पर निर्भर करती है। अधिकारियों के मुताबिक यह शुल्क रेंज 2002 में तय की गई थी और इसे संशोधित किया जाना बाकी है।
सीआईएसएफ अब तक पूरे देश में कम से कम 65 व्यवसायों को कंसल्टेंसी सेवाएं मुहैया करा चुका है। इनमें से ज्यादातर व्यावसायिक प्रतिष्ठान राज्य या केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले हैं या फिर ये सरकार से जुडे रहे हैं।
इनमें खड़गपुर और चेन्नई में इंडियन इंस्टीटयूट ऑफ टेक्नोलॉजी, एनटीपीसी, कुछ ओएनजीसी कार्यालय, हैदराबाद में निजाम का ज्वेलरी कलेक्शन आदि प्रमुख रूप से शामिल हैं।