facebookmetapixel
Advertisement
राम मंदिर चढ़ावा विवाद पर RSS ने दिया पहला बयान, कहा: घटना दुर्भाग्यपूर्ण, दोषियों को मिले कड़ी सजाEditorial: दिल्ली की नई EV नीति सही दिशा में, लेकिन अभी भी कई बड़े सुधार की जरूरतभारत को अपना AI मॉडल बनाने का जरूरत नहीं, मजबूत AI इकोसिस्टम पर दांव लगाना सही कदमहिमाचल में 2027 की चुनावी बिसात: खस्ताहाल खजाना और गुटबाजी के बीच सुक्खू सरकार की बढ़ी बेचैनीविदेशी निवेशकों से रुपये में लिया जाएगा रेगुलेटरी शुल्क, FPI और FVCI के लिए SEBI बदलने जा रहा है नियमकॉरपोरेट बॉन्ड बाजार में आई जबरदस्त रौनक, भारतीय कंपनियों ने एक ही दिन में जुटाए ₹15,960 करोड़Nifty IT इंडेक्स 30% टूटा, फिर भी पैसिव फंड्स का एयूएम 23% बढ़कर ₹5,800 करोड़ के पार‘विदेशी निवेशकों की बिकवाली के बीच घरेलू म्युचुअल फंड बने शेयर बाजार की ढाल’, SEBI का बड़ा दावाअल नीनो और महंगे ईंधन की दोहरी मार: होटलों की कमाई पर मंडराया संकट, पानी की कमी ने बढ़ाई मुश्किलेंईरान युद्ध के बीच IPO बाजार में म्युचुअल फंडों का जलवा, कई सालों के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंची हिस्सेदारी

विदेशी निदेशक की परिभाषा में बदलाव

Advertisement
Last Updated- December 10, 2022 | 1:57 AM IST

किसी सहयोगी कंपनी में उसकी साझेदार विदेशी कंपनी की तरफ से नियुक्त किए गये निदेशक को विदेशी कंपनी का प्रतिनिधि ही माना जायेगा। भले ही निवेश करने वाली कपंनी का प्रंबधन या नियंत्रण भारतीय नागरिकों के पास हो।
2009 की प्रेस सीरिज के नोट 2 के तहत ऐसी कंपनियां जिनमें 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी और बहुतायत निदेशकों की नियुक्ति का अधिकार भारतीय नागरिकों को है, उन कंपनियों में होने वाले निवेश को प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के दायरे में नहीं रखा जायेगा।
इसलिए इस पर लगाए जाने वाले रोक संबधी नियम लागू नहीं होंगे। विदेशी निवेश विशेषज्ञों के मुताबिक इस नियम के लागू हो जाने से विदेशी कंपनियों के लिए भारतीय नियंत्रण रखने वाले संवेदनशील सेक्टरों में निवेश करना आसान हो जाएगा।
लेकिन इसके बावजूद विदेशी साझेदार कंपनी की तरफ से निवेश के तहत सहायक कंपनी के प्रंबधन का नियंत्रण एक नया मुद्दा बन जाएगा। इस बाबत  सरकारी अधिकारियों का कहना है कि यह इतना आसान नहीं है।
साझेदारी में बहुतायत हिस्सेदारी रखने वाली कंपनी साझेदार विदेशी कं पनी को सहायक कंपनियों में ज्यादा बोर्ड सदस्य रखने का अधिकार क्यों देगी? निवेश विशेषज्ञ विदेशी निवेश के नए दिश-निर्देशों की गुत्थी को सुलझाने की अभी भी कोशिश कर रहें है।
सलाहकार फर्म केपीएमजी के सहायक निदेशक अर्पूव मेहता का कहना है कि किसी भी कंपनी के लिए इन दिशा-निर्देशों का व्यावाहरिक कार्यान्वन वाणिज्यिक मामलों के लिए स्वंवत्र रहेगा।

Advertisement
First Published - February 23, 2009 | 12:00 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement