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मल्टीनैशनल कंपनियों को राहत देते हुए जुर्माने में संतुलन बना रहा CCI

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उम्मीद की जा रही है कि इन दिशानिर्देशों से बाजार में प्रतिस्पर्धा को कम करने वाली परिस्थितियों की एक सूची जारी की जाएगी।

Last Updated- January 22, 2024 | 11:08 PM IST
penalty

बहुराष्ट्रीय कंपनियों को राहत देते हुए भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (सीसीआई) उनकी गैर-प्रतिस्पर्धी प्रथाओं के लिए उनके वै​श्विक कुल कारोबार के आधार पर सीधे तौर पर जुर्माना संभवत: नहीं लगाएगा। मगर वह प्रस्तावित दिशानिर्देशों के तहत कुछ खास परिस्थितियां आने पर जुर्माना लगा सकता है। इसके तहत जुर्माने की रकम उनके वै​श्विक कुल कारोबार के स्तर तक बढ़ सकती है।

इस मामले से अवगत एक व्य​क्ति ने कहा, ‘सीसीआई संतुलन स्थापित करने की को​शिश कर रहा है। भारतीय उद्योग जगत को नुकसान नहीं होना चाहिए, मगर प्रतिरोध भी दिखना चाहिए। इस संशोधन को बड़ी प्रौद्योगिकी कंपनियों पर लक्ष्य करते हुए लाया गया था।’

मामले से अवगत लोगों के अनुसार, जुर्माने की बुनियादी रकम की गणना कंपनी के संबंधित कुल कारोबार के आधार पर की जाएगी जो घरेलू बाजार में उसका कुल कारोबार है। पिछले साल मार्च में लोकसभा में पारित भारतीय प्रतिस्पर्धा संशोधन अ​धिनियम की धारा 20 के तहत प्रतिस्पर्धा आयोग को श​क्ति दी गई है कि अगर उसे उचित लगे तो वह इस प्रकार का जुर्माना लगा सकता है। मगर जुर्माने की रकम कंपनी के औसत कुल कारोबार अथवा आय का 10 फीसदी से अ​धिक नहीं होना चाहिए।

नए कानून के तहत टर्नओवर यानी कुल कारोबार को किसी व्यक्ति या उद्यम को उसके सभी उत्पाद एवं सेवाओं से प्राप्त वैश्विक कुल कारोबार के रूप में परिभाषित किया गया है। उम्मीद की जा रही है कि इन दिशानिर्देशों से बाजार में प्रतिस्पर्धा को कम करने वाली परिस्थितियों की एक सूची जारी की जाएगी। उसी आधार पर कंपनी के वैश्विक कारोबार पर जुर्माने की अंतिम रकम निर्धारित होगी।

सूत्रों ने कहा कि अगर कंपनी बार-बार गलती करती है तो उस पर अ​धिक जुर्माना लगाया जा सकता है। इसी तरह अन्य तमाम परि​स्थितियां निर्धारित की जाएंगी जहां कंपनी की जुर्माने की रकम बढ़ जाएगी। जुर्माने की रकम निर्धारित करते समय इस बात पर भी गौर किया जाएगा कि गैर-प्रतिस्पर्धी प्रथाओं के कारण वा​णिज्य किस हद तक प्रभावित हुआ है।

अगर बड़े पैमाने पर वा​णि​ज्य प्रभावित हुआ है तो इसका मतलब अधिक जुर्माना होगा। इसी प्रकार, इस बात पर भी ध्यान दिया जाएगा कि क्या कंपनी के पास कोई प्रतिस्पर्धा अनुपालन कार्यक्रम था अथवा उसने जांच के दौरान सुधारात्मक कार्रवाई की थी।

आनुपातिकता के सिद्धांत का पालन करते हुए संबंधित कुल कारोबार से ऊपर जुर्माने की गणना करते समय कंपनी की भुगतान करने की आर्थिक क्षमता को भी ध्यान में रखा जाएगा। सूत्रों ने कहा कि सीसीआई ने इन दिशानिर्देशों को तैयार करने के लिए पिछले शुक्रवार को कई बैठकें की।

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First Published - January 22, 2024 | 11:08 PM IST

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