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कार के लिए ऋण तैयार, छोटे उद्यमी हैं लाचार

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Last Updated- December 10, 2022 | 2:01 AM IST

मध्य प्रदेश के लघु एवं मझोले उद्योगों (एसएमई) को तर्कसंगत विद्युत दर, बेहतर बुनियादी ढांचा, सिंगल विंडो सिस्टम के कार्यान्वयन की जरूरत है।
मध्य प्रदेश लघु उद्योग संघ ने कहा है कि अनुपयुक्त बैंकिंग सुविधाएं, लाल फीताशाही और एसएमई के बारे में गलत धारणा आदि की वजह से इस उद्योग का विकास अवरुद्ध हो गया है।
संघ के अध्यक्ष राधाशरण गोस्वामी ने कहा, ‘पूरे भारत में लघु एवं मझोले उद्योगों के बारे में गलत धारणा व्याप्त है। 23.99 अरब रुपये की कुल सरकारी खरीद में एसएमई का योगदान महज 0.92 फीसदी ही है जबकि अमेरिका में यह 23 फीसदी है।’
उन्होंने जोर देकर कहा कि हालांकि एसएमई सब्सिडी की मांग नहीं कर रहे हैं, लेकिन बैंकों को एसएमई को ऋण उपलब्ध कराने में तेजी लानी चाहिए। गोस्वामी ने कहा, ’15-20 लाख रुपये का कार लोन तो किसी को भी आसानी से मिल जाता है। लेकिन किसी उद्यमी या निर्यातक को 1 लाख रुपये का ऋण लेने के लिए सख्त कागजात प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।’
ऊंची ब्याज दरों के कारण लघु एवं मझोले उद्योगों को कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा है। प्रोसेसिंग फीस, स्टांप डयूटी और अन्य शुल्कों को मिलाकर उन्हें 15 फीसदी से भी अधिक का ब्याज चुकाना पड़ता है।
उन्होंने कहा, ‘विकसित देशों या खासकर चीन और जापान जैसे देशों में एसएमई के लिए ब्याज दरें 4 फीसदी से अधिक नहीं हैं। हमारी सरकार एसएमई को सस्ता ऋण उपलब्ध कराने के बारे में क्यों नहीं सोचती? अगर सरकार एसएमई को सस्ती दरों पर ऋण उपल ब्ध कराए तो हम काफी हद तक मंदी से मुकाबला कर सकते हैं और रोजगार सृजन के सिलसिले को बरकरार रख सकते हैं।’
उन्होंने कहा, ‘भोपाल में अकेले गोविंदपुरा औद्योगिक इलाका पिछले चार साल में 24,000  लोगों को रोजगार देने में सफल रहा है। यह संख्या वर्ष 2004 में महज 6,000 थी। यदि सरकार श्रम कानूनों को आसान बनाती है तो हम मंदी के मौजूदा माहौल में भी और अधिक रोजगार देने में सक्षम होंगे।
लेकिन केंद्र और राज्य सरकारें इस क्षेत्र की उपेक्षा करती रही हैं। नौकरशाही ने एसएमई को लापरवाह नियम और शरत थोप कर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय निविदाओं में भाग लेने के लिए सीमित कर दिया है।
संघ ने एसएमई के लिए बिजली खपत पर न्यूनतम शुल्क को समाप्त किए जाने, सार्वजनिक इकाइयों से 45 दिनों के अंदर भुगतान सुनिश्चित किए जाने और औद्योगिक नीति के प्रावधानों के कार्यान्वयन की मांग की है।

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First Published - February 23, 2009 | 9:44 PM IST

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