रेटिंग एजेंसी स्टैंडर्ड ऐंड पूअर्स (एसऐंडपी) ने कहा है कि भारी पूंजीगत व्यय और कमजोर नकदी प्रवाह भारतीय अक्षय ऊर्जा कंपनियों को ऋण चुकाने और अपने ऋण बोझ को कम करने से रोक देता है।
भारत में अक्षय ऊर्जा के लिए कई दशक के वृद्घि अवसर उपलब्ध होने से समूचे अक्षय ऊर्जा क्षेत्र में उच्च ऋण की स्थिति बनी रहेगी।
एसऐंडपी में वैश्विक रेटिंग्स विश्लेषक अभिषेक डांगरा ने कहा, ‘कमजोर परिचालन प्रदर्शन, प्राप्तियों की देरी से संग्रहों और उच्च पूंजीगत व्यय का असर भारतीय अक्षय ऊर्जा कंपनियों के ऋण प्रोफाइल पर पड़ेगा। ऐसा अच्छे औद्योगिक मूल सिद्घांतों के बावजूद है।’
अक्षय ऊर्जा आर्थिक तौर पर परंपरागत ईंधनों के साथ प्रतिस्पर्धी हैं और इन्हें भारत में महत्त्वाकांक्षी ऊर्जा संक्रमण लक्ष्यों से लाभ होगा।
भारतीय अक्षय ऊर्जा परियोजनाओं के संबंध में कई सारे मिथक हैं। उदाहरण के लिए यदि मौसम की परिस्थिति अनुकूल नहीं है तो पवन और सौर ऊर्जा उत्पादन पर विश्वास नहीं किया जा सकता है। उत्पादन के संबंध में धारणा बहुत अधिक आशावादी हो सकता है जिससे नकदी प्रवाह पर चूक की स्थिति बनती है।
यहां तक कि सर्वाधिक रुढि़वादी उत्पादन संभावनाओं में 40 फीसदी से अधिक समय चूक हुई। ये संभावनाएं 2016 से 2021 के बीच रेटेड कंपनियों की व्यक्तिगत परियोजनाओं के लिए परिचालन प्रदर्शन के विश्लेषण पर आधारित हैं। रेटिंग एजेंसी ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप नकदी प्रवाह प्रबंधन के अनुमानों से 10 से 17 फीसदी तक कम हो सकता है।
उद्योग के लिए प्राप्तियों पर खिंचाव बना रहेगा। ऐसा इसलिए है कि यह क्षेत्र सरकारी वितरण कंपनियों के भरोसे है जो कमजोर वित्तीय स्थिति के कारण बार बार भुगतानों में देरी करती हैं।
डांगरा ने कहा, ‘मजबूत वित्तीय प्रायोजकों और इक्विटी वित्त मौकों ने कुछ निवेशकों को यह मानने पर मजबूर कर दिया है कि यह क्षेत्र अपने आमदनी और ऋण अनुपात में सुधार करने में सक्षम होगा। हालांकि, नए इक्विटी को वृद्घि पर खर्च किया जाएगा न कि ऋण बोझ को कम करने के लिए।’