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कामगारों की सेहत की बड़ी चुनौती

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Last Updated- December 15, 2022 | 5:04 AM IST

देश की सबसे बड़ी कार निर्माता कंपनी मारुति सुजूकी की पेंट शॉप पर काम करने वाले पवन सिंह की पूरी नियमित दिनचर्या में बदलाव आ गया है। उन्हें अपनी सुबह 8 बजे की पाली के लिए अब 15-20 मिनट जल्दी पहुंचना होता है ताकि शरीर के तापमान की जांच के साथ पूरे शरीर के सैनिटाइजेशन की प्रक्रिया का पालन भी किया जा सके। कोरोनावायरस संक्रमण के बढ़ते खतरे के बीच कंपनी ने एहतियात के तौर पर मानक परिचालन प्रक्रिया (एसओपी) को सावधानी से तैयार किया है जिसमें एक इन-हाउस ऐप और अन्य उपाय भी शामिल हैं। कंपनी ने यह सुनिश्चित करने की कोशिश की है कि कारखाने का परिसर कोविड-19 से मुक्त रहे। हालांकि कारखाने में काम शुरू होने के बाद संक्रमण का एक मामला सामने आया था जिसके बाद ज्यादा सावधानी परती जा रही है।
मारुति ने अपनी पाली के समय और हर पाली में काम करने वाले कर्मचारियों की संख्या में भी बदलाव किया है। सूत्रों का कहना है कि कोविड से पहले के दौर की तुलना में शारीरिक दूरी बनाए रखने के लिए कुल कार्यबल में से महज 20-25 प्रतिशत कामगारों को ही बुलाया जा रहा है। क्या इससे उत्पादन को नुकसान हो रहा है? मारुति सुजूकी के चेयरमैन आर सी भार्गव का कहना है कि उत्पादन में नुकसान होगा, लेकिन आगे बढऩे का यही एकमात्र रास्ता है। देश में कोविड-19 के मामले बढऩे के साथ ही कंपनियों ने महसूस किया है कि उत्पादन बनाए रखने और कर्मचारियों की सुरक्षा सुनिश्चित करना एक बड़ी चुनौती है।
बजाज ऑटो में भी कोविड के मामले लगातार बढ़ते हुए दिखे और कम से कम आधा दर्जन कामगारों की इस महामारी से मौत हो गई। ऐसे में शुक्रवार से बजाट ऑटो और औरंगाबाद में अन्य विनिर्माण इकाइयां 9 दिनों के लिए अपने संयंत्र बंद रखेंगी क्योंकि जिला प्रशासन ने लॉकडाउन में सख्ती दिखाई है। निश्चित तौर पर इससे उत्पादन पर असर पड़ेगा लेकिन कंपनियों को जुलाई के बाकी दिनों में क्षतिपूर्ति होने की उम्मीद है।
इस वक्त नकदी की जरूरत पूरा करना प्राथमिकता है ऐसे में ज्यादातर कंपनियां काम की पाली में काफी नियंत्रण कर रही हैं ताकि कामगारों की कम जरूरत पड़े और उनके स्वास्थ्य की निगरानी की जा सके।
कर्मचारी सुरक्षा
हेवी इंजीनियरिंग, वाहन और वाहन पुर्जे के मुकाबले एफएमसीजी कंपनियों में कामगारों की जरूरत कम ही रहती है। फिर भी कई कंपनियां उन उत्पादों पर ध्यान दे रही हैं जिनकी बिक्री तेजी से हो सकती है और जो बेहद अनिवार्य सामान हैं। एफएमसीजी कंपनियां केवल एकल पाली में ही काम कर रही हैं। वहीं थकान और संक्रमण के खतरे को कम करने के लिए डबल शिफ्ट पर बारीकी से नजर रखी जाती है।
पार्ले प्रोडक्ट्स के वरिष्ठ श्रेणी प्रमुख मयंक शाह का कहना है कि कंपनी सामाजिक दूरी के नियमों को ध्यान में रखते हुए अपने संयंत्र में प्रवेश करने और बाहर निकलने वाले कामगारों की संख्या में 50 फीसदी की कमी लाने के नियमों का सख्ती से पालन कर रही है। वहीं दूसरी ओर डाबर ने अपने कामगारों के लिए विनिर्माण स्थल से परिवहन सेवाएं भी दी हैं। इसके अलावा, विनिर्माण संयंत्रों के पास ही कुछ श्रमिकों के रहने का इंतजाम भी किया गया है। डाबर इंडिया के मुख्य कार्याधिकारी (सीईओ) मोहित मल्होत्रा कहते हैं कि इसके अलावा डाबर अपने सभी कर्मचारियों को मेडिकल कवर उपलब्ध करा रहा है ताकि वे स्वास्थ्य संबंधी चिंताओं को लेकर सुरक्षित महसूस करें। डेलॉयट इंडिया के पार्टनर विशाल जैन कहते हैं कि महामारी ने सभी को लोगों को यह महसूस कराया है कि एसओपी को नया स्वरूप देने की जरूरत है और कार्यस्थल पर सुरक्षा और भरोसा बनाना ही रिकवरी के लिए एक महत्त्वपूर्ण रास्ता होगा।
संक्रमण के कुछ मामले की सूचना देने वाली कंपनी टोयोटा किर्लोस्कर मोटर (टीकेएम) के एक प्रवक्ता कहते हैं, ‘राष्ट्रीय और स्थानीय प्राधिकरणों के मार्गदर्शन और समर्थन के साथ टीकेएम संक्रमण को आगे फैलने से रोकने के लिए जरूरी व्यापक कार्रवाई कर रही है और कंपनी अपने दिशानिर्देशों और देखभाल के मानकों के आधार पर पर्याप्त आंतरिक सावधानियां बरत रही है। कंपनियां जिन विश्वास बहाली के उपायों को अपना रही हैं, उनमें से एक कोविड जांच और स्वास्थ्य जांच है।’
जेएसडब्ल्यू स्टील के बेल्लारी संयंत्र में अधिकारी हर हफ्ते दौरा करते हैं ताकि हर किसी की जांच की जा सके खासतौर पर बुजुर्ग, ज्यादा या हल्के लक्षणों वाले लोगों की जांच। जून के शुरुआती दौर में संयंत्र में संक्रमितों की बड़ी तादाद की सूचना मिली।
वेदांत के तेल एवं गैस परिचालन के काम में 21 दिन के काम (स्टाफ का परिवर्तन) की व्यवस्था है ताकि चार-पांच दिनों तक कामगारों को क्वारंटीन में रखा जा सके। यहां भी कामगारों के  लक्षण की जांच हो रही है और कोविड-19 की जांच हो रही है। वेदांता में ग्रुप के सीईओ सुनील दुग्गल कहते हैं की  अगर रिपोर्ट ठीक होती है तब उन्हें काम पर लिया जा सकता है। संयंत्रों और खदानों में बाहर से आने वाले किसी भी व्यक्ति को चार-पांच दिनों तक क्वारंटीन में रखा जाता है और कोविड जांच में निगेटिव आने वाले लोगों को ही प्रवेश करने दिया जाता है।
उत्पादन पर प्रभाव
भार्गव कहते हैं, ‘इस बात को लेकर काफी अनिश्चितता की स्थिति है कि रिकवरी कब होगी। नए शारीरिक दूरी वाले नियम से उत्पादकता भी कुछ कम होती है।’ वालुज औद्योगिक क्षेत्र में बजाज ऑटो की इकाई दिशानिर्देश के अनुरूप 30-40 फीसदी क्षमता पर काम कर रही थी। इस इकाई का बजाज के कुल वार्षिक उत्पादन में आधे की हिस्सेदारी है। श्री सीमेंट के अधिकारियों का कहना है कि निश्चित रूप से सामाजिक दूरी के मानदंडों के कारण एक विशेष  उत्पादन गतिविधि पर प्रभाव पड़ा है।
गोदरेज ऐंड बॉयस के कार्यकारी उपाध्यक्ष कमल नंदी का कहना है कि सामाजिक दूरी के कारण कर्मचारियों की संख्या में कमी आई है और इससे उत्पादकता में भी कमी आई है। हालांकि अब उनका मानना है कि स्थिति में तेजी से सुधार हो रहा है। पैनासॉनिक इंडिया के प्रवक्ता का कहना है कि 25 प्रतिशत क्षमता के साथ विनिर्माण कार्य फिर से शुरू किया गया था और इसे हर महीने बढ़ाया जा सकता है।
लेकिन रिकवरी की राह चुनौतियों से भरी होगी लेकिन कारोबार निरंतरता की योजना लागू की जा रही है। जेएसडब्ल्यू स्टील के उप प्रबंध निदेशक विनोद नवल कहते हैं, ‘हमारे पास तत्काल रिप्लेसमेंट तैयार है ताकि समय की बरबादी न हो और काम चल सके। कुछ स्थानों पर जहां स्थिति गंभीर है वहां वरिष्ठ लोग कदम उठाएंगे अगर जरूरत होगी।’
(साथ में अरिंदम मजूमदार, अर्णव दत्ता, विवेट सुजन पिंटो, अदिति दिवेकर, अमृता पिल्लैै, शैली सेठ मोहिले और ईशिता आयान दत्त)

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First Published - July 9, 2020 | 11:06 PM IST

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