भारत हेवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (बीएचईएल) की योजना गैर-पारंपरिक ऊर्जा और ट्रांसमिशन कारोबार की कंपनियों के अधिग्रहण की है।
कंपनी अगले पांच वर्ष में अपने कुल कारोबार को 50,000 करोड़ रुपये से अधिक करने की योजना के तहत कंपनियों का अधिग्रहण करेगी।
बीएचईएल के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक रवि कुमार का कहना है, ‘नए पहचाने गए कारोबारी क्षेत्र जैसे गैर-पारंपरिक ऊर्जा और ट्रांसमिशन में भविष्य में हमारा विकास मुख्य तौर पर अधिग्रहण और विलय के जरिये होगा। हम देश-विदेश में संभावनाओं को तलाश रहे हैं।’
उनका कहना है, ‘अगले कुछ वर्षों में अधिग्रहण और विस्तार के लिए हमारे पास पर्याप्त रकम है।’ इसके अलग कंपनी सौर ऊर्जा क्षेत्र में उतरने के लिए दो जापानी कंपनियों से तकनीकी या रणनीति साझेदारी पर बातचीत कर रही है।
कंपनी की योजना 3,000 करोड़ रुपये के निवेश के साथ पश्चिम बंगाल में एक एकीकृत संयंत्र लगाने की भी है। इस संयंत्र में पॉलिक्रिस्टैलिन सिलिकन (पॉलीसिलिकन) सिल्ली, सौर सेल, मॉडयूल और सौर पैनल सिस्टम बनाए जाएंगे।
माना जा रहा है कि बीएचईएल बेंगलुरु की भारत इलेक्ट्रॉनिक्स के साथ रणनीतिक साझेदारी के तहत उपक्रम बना सकती है।
सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी बीएचईएल इस समय घरेलू बाजार में कड़े मुकाबले का सामना कर रही है। विदेशी कंपनियां इस समय भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी को बढ़ाने में लगी हुई हैं और बीएचईएल भी विकासशील देशों में संभावनाएं तलाश रही है।
रवि कुमार का कहना है, ‘मौजूदा समय में हमें हमारी कुल कमाई का सिर्फ 7 प्रतिशत ही विदेशों से मिलता है और हमें उम्मीद है कि अगले कुछ वर्षों में यह आंकड़ा बढ़कर 10 प्रतिशत हो जाएगा।
इसके साथ ही हम मिस्र और म्यांमार जैसे देशों में ट्रांसफॉर्मर बनाने वाले संयंत्र का भी अधिग्रहण करने पर विचार कर रहे हैं, क्योंकि यहां और अधिक क्षमताओं की गुंजाइश नहीं है।’
उनका कहना है कि ट्रांसमिशन उपकरणों के कारोबार में उतरने के कंपनी जापान की एक बड़ी कंपनी के साथ तकनीकी गठजोड़ के लिए बातचीत कर रही है। ट्रांसमिशन उपकरणों के क्षेत्र में उतरने के लिए कंपनी ने मध्य प्रदेश के भोपाल में एक पुराने संयंत्र के इस्तेमाल की योजना बना चुकी है।