बिजली उत्पादन करने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी एनटीपीसी लिमिटेड ने गौतम थापर के अवंता ग्रुप से ऋणग्रस्त झाबुआ ताप विद्युत परियोजना (600 मेगावॉट) का अधिग्रहण किया है। यह अधिग्रहण ऋण शोधन अक्षमता एवं दिवालिया संहिता (आईबीसी) की प्रक्रिया के तहत किया गया है। यह ऐसी पहली परिसंपत्ति है जिसे एनटीपीसी ने नैशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) के जरिये हासिल की है।
एनटीपीसी के सूत्रों ने इस खबर की पुष्टि की है लेकिन खबर लिखे जाने तक कंपनी की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। इस सौदे का अनुमानित आकार 1,830 करोड़ रुपये है। इस ताप विद्युत इकाई में शेष 50 फीसदी हिस्सेदारी लेनदारों की होगी। झाबुआ संयंत्र का यह मामला मई 2019 में एनसीएलटी के पास भेजा गया था। अलवरेज ऐंड मार्शल ने झाबुआ पावर की कॉरपोरेट दिवालिया समाधान प्रक्रिया (सीआईआरपी) पूरी की। अलवरेज ऐंड मार्शल इंडिया के प्रबंध निदेशक वेंकटरमण रंगनाथन ने कहा, ‘यह कई मोर्चों पर बेहद महत्वपूर्ण सौदा था, जिनमें आईबीसी के इस्तेमाल के साथ एनटीपीसी द्वारा पहला अधिग्रहण होना और ऋणदाताओं की भविष्य में झाबुआ पावर में 50 प्रतिशत इक्विटी होना मुख्य रूप से शामिल हैं। हम सीआईआरपी अवधि के दौरान एबिटा 2.5 गुना बढ़ने से इस 600 मेगावॉट क्षमता वाली कोयला आधारित विद्युत संयंत्र परियोजना के प्रदर्शन में बड़ा बदलाव ला सकते हैं। ‘
एनसीएलएटी ने इस साल जुलाई में झाबुआ के लिए समाधान योजना सौंपने के लिए एनटीपीसी की पात्रता को बरकरार रखा था। ऐसा अवंता द्वारा पेश किए गए एकमुश्त निपटान प्रस्ताव की प्रतिक्रिया में किया गया, जिसे एनसीएलटी ने वाणिज्यिक तौर पर उपयुक्त नहीं पाया था।