मंदी की मार एयरलाइंस कंपनियों पर खूब पड़ी है। इसकी वजह से चालू वित्त वर्ष के दौरान विमानन कंपनियों को करीब 10,000 करोड़ रुपये का नुकसान होने का अनुमान है।
दरअसल, इसकी वजह यह है कि विमानन कंपनियां मंदी को समय पर पहचान नहीं पाई। भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण के मुताबिक, चालू वित्त वर्ष में घरेलू और अंतरराष्ट्रीय ट्रैफिक में 7.2 फीसदी गिरावट आने की संभावना है, जबकि हवाई जहाज के आवागमन में 0.3 फीसदी की बढ़ोतरी हो सकती है।
इसका मतलब यह हुआ कि विमानन कंपनियां यात्रियों की संख्या में गिरावट के बावजूद अपनी क्षमता में बढ़ोतरी करेगी। एएआई के जनरल मैनेजर, कॉरपोरेट प्लानिंग डीपी सिंह का कहना है कि विमानन कंपनियां मंदी को समय पर पहचान नहीं पाई।
उन्होंने बताया कि विमानन कंपनियों ने सितंबर माह में जहां उड़ानों की संख्या में कटौती की थी, वहीं जनवरी में उसे वापस ले लिया, जिसकी वजह से कई सीटें खाली रहने लगीं। यह स्थिति घरेलू और अंतरराष्ट्रीय, दोनों उड़ानों में साफ देखी जा सकती है।
घरेलू उड़ानों में यात्रियों की संख्या में जहां 12 फीसदी की गिरावट आई, वहीं उड़ानों की संख्या में मात्र 1.9 फीसदी की ही कमी आई। अंतररष्ट्रीय उड़ानों की बात करें, तो वहां यात्रियों की संख्या में करीब 7 फीसदी की कमी दर्ज की गई, जबकि विमानन कंपनियों ने अपनी क्षमता में 9.9 फीसदी की बढ़ोतरी की है।
इस क्षेत्र के जानकारों का कहना है कि मौजूदा समय में विमानन कंपनियों को अपनी उड़ानों की संख्या में करीब 19-20 फीसदी की कटौती करने और किराए में 15 फीसदी की बढ़ोतरी की जरूरत है, तभी वे घाटे से उबर पाएंगी। हालांकि अभी विमानन कंपनियों में ट्रैफिक लोड 65 फीसदी है, जबकि मुनाफे के लिए इसे कम से कम 90 फीसदी होना चाहिए।
मुंबई स्थित ब्रोकरेज फर्म सेंचुरियम के महंतेश सबारद का कहना है कि दिसंबर में विमानन ईंधन की कीमतों में कमी की वजह से उनकी लागत में करीब 8-10 फीसदी की कमी आई। इससे विमानन कंपनियों का मुनाफे के लिए ट्रैफिक 105 फीसदी से घटकर 90 फीसदी पर आ गया है।
ऐसे में उड़ानों की संख्या में 20 फीसदी की कटौती कर ट्रैफिक लोड को 65 से 80 फीसदी किया जा सकता है, वहीं किराए में 15 फीसदी की बढ़ोतरी करने से मुनाफे के लिए ट्रैफिक 90 से घटकर 80 फीसदी आ सकता है। लेकिन यह तभी संभव है, जब भविष्य में भी यात्रियों की संख्या इतनी ही हो।
सच तो यह है कि घरेलू बाजार में यात्रियों की संख्या में प्रतिमाह गिरावट दर्ज की जा रही है। ऐसे में घरेलू विमानन कंपनियां उड़ानों की संख्या में कटौती क्यों नहीं कर रही हैं, यह समझ से परे है।