कंपनियां

‘AI का डर सिर्फ अरबों डॉलर के निवेश को सही ठहराने का जरिया’, LTM के CEO का बड़ा दावा

अय्यर का तर्क है कि बड़ी फाउंडेशन मॉडल कंपनियों पर एआई इन्फ्रा और मॉडल विकास में निवेश किए गए अरबों डॉलर को सही ठहराने का दबाव है

Published by
अविक दास   
Last Updated- February 25, 2026 | 10:23 PM IST

आर्टिफिशल इंटेलिजेंस के वैश्विक आईटी सेवा कंपनियों के काम छीन लेने की तेज होती जा रही बहस के बीच एलटीएम (पूर्व की एलटीआईमाइंडट्री) के चीफ ग्रोथ ऑफिसर कृष्णन अय्यर का कहना है कि नई तकनीक के प्रसार के साथ-साथ पूंजी दबाव के कारण इस तरह की चर्चाओं को हवा मिल रही है।

अय्यर का तर्क है कि बड़ी फाउंडेशन मॉडल कंपनियों पर एआई इन्फ्रा और मॉडल विकास में निवेश किए गए अरबों डॉलर को सही ठहराने का दबाव है। यही वजह है कि वे इस की तरह की बहसों को आगे बढ़ा रहे हैं कि आने वाले समय में आईटी सेवा कंपनियां अप्रासंगिक हो जाएंगी।

34वें नैसकॉम टेक्नॉलजी लीडरशिप फोरम के मौके पर बिज़नेस स्टैंडर्ड के साथ साक्षात्कार में अय्यर ने कहा, ‘दूसरे पक्ष को एआई ढांचे और मॉडलों में निवेश किए गए अरबों डॉलर पर निश्चित ही रिटर्न दिखाना होगा, जिससे अभी तक कुछ सार्थक निकलकर नहीं आया है। इसलिए वे यह दिखा रहे हैं कि आगे इसका महत्त्व और अधिक बढ़ेगा।’

अय्यर की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है जब 3 लाख करोड़ डॉलर का वैश्विक आईटी सेवा उद्योग (भारत का 300 अरब डॉलर से अधिक का सेवा क्षेत्र भी शामिल) राजस्व वृद्धि, कर्मचारी प्रबंधन मॉडल और मार्जिन पर जेनरेटिव एआई के दीर्घकालिक प्रभाव के बारे में बढ़ते सवालों से जूझ रहा है। आईटी उद्योग के अप्रासंगिक होने के दावों को खारिज करते हुए अय्यर ने कहा कि क्लाइंट और आईटी सेवा फर्म दोनों ही एआई को लेकर काफी उत्साहित हैं। यह अलग बात है कि वे सावधानी के साथ आगे बढ़ रही हैं।

उन्होंने कहा, ‘हम और हमारे ग्राहक, दोनों ही नई तकनीक को लेकर उत्साहित हैं। लेकिन इसके इस्तेमाल से संभावित नुकसान को लेकर सतर्क हैं।’ उन्होंने कहा, ‘इसका बड़ा कारण एआई प्रणाली की मौजूदा प्रकृति में ही निहित है। आज अधिकांश एआई प्रणालियां तयशुदा नहीं हैं, बल्कि वे संभावनाओं के आधार पर काम करती हैं और इसके नियत और संभाव्य परिणामों के बीच का अंतर अभी भी बहुत अधिक है। हो सकता है अगले तीन-चार वर्षों में यह कम हो जाए।’ जब तक यह अंतर कम नहीं हो जाता, कंपनियां पूरी तरह एआई पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं।

उन्होंने कहा, ‘जेनएआई के मामले में आप कम श्रमबल के साथ भी अधिक काम कर पाएंगे। यदि आपको पहले 20,000 लोगों की जरूरत थी, तो आगे आपको 5,000 की जरूरत पड़ सकती है।’ लेकिन, उनका तर्क है कि उत्पादकता बढ़ने के साथ यह नहीं कह सकते कि इससे काम के अवसर कम हो जाएंगे। ‘यदि आप अधिक कुशलता से डिलिवरी कर सकते हैं, तो आपको अधिक काम मिल सकता है।’

अय्यर ने कहा, ‘हम एआई को अपना रहे हैं, लेकिन यह भी सुनिश्चित कर लेना चाहते हैं कि इससे परिणाम हासिल हों। जैसे-जैसे संभाव्य और नियतात्मक सिस्टम के बीच का अंतर कम होता जाएगा, कंपनी का आत्मविश्वास बढ़ता जाएगा।’ भविष्य को लेकर वह कहते हैं, ‘बाजार को यह देखना होगा कि आईटी सेवा कंपनियां अगली कुछ तिमाहियों में कैसा प्रदर्शन करती हैं। यदि राजस्व और मार्जिन नहीं बढ़ते हैं, तो आपको यह कहने का पूरा अधिकार है कि एआई फायदे के बजाय नुकसान पहुंचा रहा है।’

एलटीएम के शीर्ष अधिकारी की यह टिप्पणी वैश्विक स्तर पर आईटी शेयरों में उतार-चढ़ाव के बीच आई है, जिसमें निवेशक फाउंडेशन मॉडल और एआई आधारित कोडिंग टूल में तेजी से हुई प्रगति के मद्देनजर वृद्धि को लेकर आशंकित हो रहे हैं।

First Published : February 25, 2026 | 10:23 PM IST