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‘EV सेक्टर में आएगा बड़ा उछाल’, BS ‘मंथन’ में एक्सपर्ट्स ने कहा: चुनौतियों के बावजूद रफ्तार है बरकरार

एक्सपर्ट्स का कहना है कि मजबूत अर्थव्यवस्था और बेहतर तकनीक के दम पर भारत में इलेक्ट्रिक वाहनों की पहुंच तेजी से बढ़ेगी, जिससे 2030 तक जलवायु लक्ष्यों को पाना आसान होगा

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 25, 2026 | 11:11 PM IST

भारत के इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) के पारिस्थितिकी तंत्र में कई बुनियादी चुनौतियां होने के बावजूद अब यहां से ईवी उद्योग तेजी से आगे बढ़ेगा। ईवी उद्योग के दिग्गजों ने कहा कि अभी भारत के ईवी तंत्र के समक्ष चार्ज होने के बाद दूरी की चिंता, अपर्याप्त आधारभूत ढांचा, चार्जर अपटाइम व रखरखाव की खामियां, बैटरी का डीग्रेडेशन, तेजी से बदलते सुरक्षा मानक और वाणिज्यिक वाहनों में ईवी के अधिक उपयोग का दबाव आदि चिंताएं हैं। फिर भी मजबूत यूनिट इकॉनमी, बढ़ता दायरा, तकनीक में सुधार और सहायक नीतिगत रफ्तार से यह भरोसा बढ़ता है कि अब ईवी वाहन तेजी से गति पकड़ेगे।

बिज़नेस स्टैंडर्ड के सालाना कार्यक्रम मंथन 2026 में विशेषज्ञों की परिचर्चा हुई। इसमें विन फास्ट इंडिया के सीईओ तपन घोष, ऑयलर मोटर्स के संस्थापक और सीईओ सौरव कुमार, बोल्ट डॉट अर्थ के सीईओ राघव भारद्वाज ने शिरकत की। बिज़नेस स्टैंडर्ड के दीपक पटेल के साथ हुई इस बातचीत में विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि ईवी के कार्यान्वयन में चुनौतियां हैं लेकिन ईवी को लेकर दिशा स्पष्ट है।

घोष  ने आंकड़ों में बात की। उन्होंने कहा कि बीते छह वर्षों में ईवी की सीएजीआर दर 63 प्रतिशत है। उन्होंने कहा, ‘मुझे ज्यादा उम्मीद है कि यह वास्तविक बढ़ोतरी है और यह टिकाऊ है।’ उन्होंने कहा कि एक बार जब उद्योग सामूहिक रूप से वर्तमान बाधाओं को दूर कर लेता है तो ‘हम बदलाव के स्तर (इन्फ्लेक्शन पॉइंट) पर पहुंच जाएंगे और फिर यह तेज से उछाल लेने वाला है।’

कारों के मामले में पहुंच दो गुनी हो गई है। यह दो साल पहले दो प्रतिशत थी जो दो साल में बढ़कर पिछले कैलंडर वर्ष तक चार प्रतिशत हो गई है। इन कारों की मासिक बिक्री 6000-7000 वाहन से बढ़कर करीब 17,000 हो गई है। इन वाहनों का सालाना पंजीकरण करीब 1,77,000 के आंकड़े को छू रहा है। उन्होंने इंगित किया कि यह बदलाव तेजी से आया है और यह गति मजबूत बनी हुई है।

कुमार ने कहा कि वाणिज्यिक वाहनों में विद्युतीकरण के रुझान कम हैं और इसका ज्यादा कारण अर्थशास्त्र है। उन्होंने कहा, ‘मुझे लगता है कि वाहनों का विद्युतीकरण होगा। सवाल यह है कि किस गति से होगा।’ उन्होंने तर्क दिया कि आंकड़े बताते हैं कि जीएसटी में बदलावों – जिससे डीजल और पेट्रोल से चलने वाले वाहन सस्ते हो गए हैं – या सब्सिडी में बदलावों के बावजूद विद्युतीकरण की दरें ऊंची बनी हुई हैं। उन्होंने कहा कि अब पेट्रोल-डीजल वाहनों (आईसीई) के इंजन मॉडलों के समान मूल्य पॉइंट पर ईवी का निर्माण किया जा सकता है और उसकी तुलना में कीमत दी जा सकती है। आधारभूत ढांचा बढ़ रहा है, ओईएम के बीच प्रतिस्पर्धा बढ़ रही है और ग्राहकों को ज्यादा प्रोत्साहन के साथ लुभाया जा रहा है।

कुमार ने कहा, ‘वाहनों के विद्युतीकरण की दर बदल सकती है। मुझे लगता है कि हम तीन साल बाद मिलेंगे और उस समय के आंकड़ों से आश्चर्यचकित होंगे।’

भारद्वाज ने अर्थव्यवस्था और उपभोक्ता व्यवहार दोनों में विश्वास जताया। उन्होंने कहा, ‘मुझे इसमें कोई संदेह नहीं है कि भारत 2030 तक बदल जाएगा और अपने जलवायु लक्ष्यों को प्राप्त कर लेगा।’ उन्होंने कहा कि भारतीय उपभोक्ता बेहद स्मार्ट हैं और ठोस संख्याओं पर प्रतिक्रिया करते हैं। ईवी वाहन ड्राइविंग की यूनिट इकनॉमी को मात देना मुश्किल है। हालांकि इस समय स्वामित्व की कुल लागत थोड़ी ज्यादा हो सकती है। उन्हें उम्मीद है कि बैटरी टेक्नॉलजी में सुधार से समय के साथ लागत में तेजी से कमी आएगी।

उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन जैसी वैकल्पिक तकनीकों पर चर्चा की जा सकती है, लेकिन बिजली का पहले से ही एक प्रमुख लाभ है : यह व्यापक रूप से वितरित और पूरे देश में उपलब्ध है। फिर भी तीनों ने स्वीकार किया कि आशावाद संरचनात्मक चुनौतियों को नहीं मिटाता है।

First Published : February 25, 2026 | 10:58 PM IST