अमेरिकी सॉफ्टवेयर कंपनी एडोबी सिस्टम्स अगले एक साल में भारत में अपनी शोध और विकास (आर ऐंड डी) क्षमता को दुगनी करने की योजना बना रही है।
एडोबी इंडिया के प्रबंध निदेशक (आर ऐंड डी) और वरिष्ठ उपाध्यक्ष (प्रिंट और प्रकाशन कारोबार इकाई) नरेश गुप्ता ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘कंपनी बोर्ड ने दो नए कैंपसों के विस्तार के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है। हमलोग जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में हैं। 2010 के अंत या 2011 के शुरू तक कैंपस विस्तार करना हमारा लक्ष्य है। फिलवक्त नोएडा और बेंगलुरु कैंपस की क्षमता क्रमश: 1,500 और 450 है, जो विस्तार के बाद दुगनी हो जाएगी।’
एडोबी ने भारत में नोएडा और बेंगलुरु कैंपस से अपने शोध कार्यक्रम की शुरुआत 1997 में की थी। भारतीय शोध और विकास का योगदान कंपनी के कुल शोध का 30 फीसदी है।
इस शोध कैंपस के पास पेज मेकर, फ्रेम मेकर, इलस्ट्रेटर, फोटोशॉप एलिमेंट, कैप्टिव और पीडीएफ रीडर्स जैसे तकरीबन 20 उत्पाद है। पिछले सात साल में कंपनी ने ऐसे 100 उत्पादों का पेटेंट करवाया है।
पिछले छह साल में एडोबी 25 फीसदी की दर से चक्रवृद्धि सालाना विकास कर रही है। अपने उत्पादों और तकनीकों के जरिये कंपनी ने भारत में भी अपना पैर काफी पसार लिया है। गुप्ता कहते हैं कि कंपनी भारत में आने वाले समय में और अधिक विस्तार करेगी।
कंपनी उन उत्पादों के निर्माण के बारे में सोच रही है, जो भारतीय बाजार में दूसरी कंपनियों द्वारा उतारे गए हैं। उनका मानना है कि आईटी और ग्राहक सेवा के विस्तार के मद्देनजर शोध और विकास पर ध्यान केंद्रित करना समय की मांग है।
भारत में एक महीने में 1.5 करोड़ मोबाइल उपभोक्ता बन रहे हैं। कंपनी के लिए यह एक बड़ी चुनौती है कि मोबाइल का इस्तेमाल करने वाले ग्राहकों को आकर्षित किया जाए। इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में लोग कंप्यूटर और तकनीक के इस्तेमाल को लेकर सजग नहीं हैं, इसलिए वहां भी काफी संभावनाएं हैं।
वे कहते हैं, ‘भारत में कई लोग ऐसे हैं, जो इंटरनेट का इस्तेमाल पहली बार मोबाइल के जरिये करते हैं। हालांकि इंटरनेट का ऐसा इस्तेमाल पर्याप्त नहीं है। हमारा उद्देश्य है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करने वाले इच्छुक ग्राहकों को विस्तृत तकनीक की ओर खींचा जाए। इसके अलावा डेवलपर्स को इस तरह की सामग्री और एप्लीकेशन तैयार करने के लिए प्लेटफॉर्म मुहैया कराने के क्षेत्र में काफी अवसर है।’
कंपनी चार तरह के तकनीक ट्रेंड पर ध्यान केंद्रित करना चाह रही है- ऐसे धनी लोग जो फ्लैश वीडियो के जरिये ज्यादातर वीडियो सामग्री पाना चाहते हैं, मोबिलिटी स्पेस, डेस्कटॉप से सॉफ्टवेयर सेवा की तरफ झुकाव और ओपन सोर्स प्लेटफॉर्म का निर्माण।
वे कहते हैं, ‘ हमलोग इस तरह की तकनीक ट्रेंड के पीछे की संभावनाओं पर विचार कर रहे हैं।’ एडोबी इंडिया मोबाइल डिवाइस के लिए ओपन स्क्रीन जैसी परियोजना पर भी काम कर रही है।
इस फ्लैश आधारित तकनीक से आईटी उद्योग को ऊंचा मानक प्रदान करने में मदद मिलेगी। इससे डेवलपरों को समृद्ध सामग्री बनाने में भी मदद मिलेगी। इससे मोबाइल ऑपरेटिंग सिस्टम, प्रोसेसिंग पावर, स्क्रीन मानक और बैटरी लाइफ को बेहतर बनाने की दिशा में भी काम किया जा सकेगा।