अदाणी समूह अहमदाबाद हवाई अड्डे में 2023 से 2027 के बीच 10,000 करोड़ रुपये का निवेश करेगा। इसके जरिये हवाई अड्डे की यात्री संचालन क्षमता में तीन गुना वृद्धि की जाएगी ताकि उसे एक प्रमुख क्षेत्रीय केंद्र बनाया जा सके।
पिछले सप्ताह निवेशकों को दी गई एक प्रस्तुति में अदाणी समूह के वरिष्ठ अधिकारियों ने अहमदाबाद हवाई अड्डे के बारे में अपनी योजनाओं का खुलासा किया। प्रस्तुति के अनुसार, समूह इस हवाई अड्डे को एक प्रमुख क्षेत्रीय केंद्र के रूप में विकसित करना चाहता है जो भुज, कांडला, जामनगर और भावनगर को जोड़ेगा। इसकी सालाना यात्री संचालन क्षमता को मौजूदा 90 लाख से बढ़ाकर 2027 में 2.8 करोड़ करने की योजना है।
अदाणी समूह ने नवंबर 2020 में भारतीय विमानपत्तन प्राधिकरण (एएआई) से अहमदाबाद हवाई अड्डे का नियंत्रण हासिल किया था। प्रस्तुति में कहा गया है कि अहमदाबाद हवाई अड्डा एक ‘वित्तीय राजधानी’ है जहां पर्यटन की विविध संभावनाएं मौजूद हैं। फिलहाल अहदाबाद में उद्योग काफी फल-फूल रहा है। कंपनी ने कहा है कि शहर में मौजूद होटल कमरों में 8.59 फीसदी की वार्षिक चक्रवृद्धि दर से बढ़ोतरी दिख रही है।
इस हवाई अड्डे पर वाणिज्यिक क्षेत्र फिलहाल 2,000 वर्ग मीटर है जिसे बढ़ाकर 2025 तक 9,000 वर्ग मीटर करने की योजना है। इससे गैर-हवाई राजस्व में भी इजाफा होगा। अदाणी समूह चाहता है कि कई प्रीमियम ब्रांड अहमदाबाद हवाई अड्डे पर अपने आउटलेट खोले। इससे औसत लेनदेन मूल्य में वृद्धि सुनिश्चित होगी।
शहर के हवाई अड्डे के लिए नियोजित पूंजीगत व्यय का उपयोग समर्पित मालवाहक बे, एयर फ्रेट स्टेशन, ई-कॉमर्स घरेलू क्षेत्रीय केंद्र और रोड फीडर सेवाओं के साथ एक एकीकृत कार्गो टर्मिनल विकसित करने में भी किया जाएगा।
प्रस्तुति में कहा गया है कि अहमदाबाद हवाई अड्डे पर अंतरराष्ट्रीय एवं घरेलू कार्गो के लिए एक ट्रांसशिपमेंट हब भी विकसित किया जाएगा।
एएआई ने फरवरी 2019 में प्रतिस्पर्धी बोली प्रक्रिया के जरिये छह हवाई अड्डों का निजीकरण किया था जिनमें लखनऊ, जयपुर, मंगलूरु, तिरुवनंतपुरम, अहमदाबाद और गुवाहाटी शामिल हैं। अदाणी समूह ने इन हवाई अड्डों के लिए आक्रामक बोली लगाई थी और सभी छह हवाई अड्डों के लिए 50 साल तक के परिचालन अधिकार हासिल किए थे।
पिछले कुछ वर्षों के दौरान अदाणी समूह ने विमानन क्षेत्र में धीरे-धीरे अपनी उपस्थिति बढ़ाई है। मंगलवार को उसने 400 करोड़ रुपये के एंटरप्राइज मूल्य पर एयर वर्क्स के अधिग्रहण की घोषणा की थी। एयर वर्क्स भारत की दूसरी सबसे पुरानी विमान रखरखाव, मरम्मत एवं ओवरहॉल इकाई है।