ऊर्जा और ऑटोमेशन क्षेत्र की कंपनी एबीबी इंडिया ने इस साल पूंजीगत विस्तार की किसी भी योजना को हरी झंडी नहीं दिखाने का फैसला किया है। कंपनी ने इसका कारण मौजूदा मंदी के दौर को बताया।
हालांकि, कंपनी ने यह भी कहा है कि वह पहले से चल रही परियोजना पर काम नहीं रोकेगी। बेंगलुरु स्थित इस कंपनी ने पिछले साल में पूंजीगत विस्तार की सालाना योजानाओं में करीब 230 करोड़ रुपये का निवेश किया था।
इस साल उम्मीद है कि निवेश घटकर 70-80 करोड़ रुपये तक सिमट जाएगा। ये रकम भी पुरानी परियोजनाओं पर खर्च किए जाएंगे।
एबीबी के क्षेत्रीय मुख्य वित्तीय अधिकारी (सीएफओ) के. राजगोपाला का कहना है कि, ‘हमने खर्चे से संबंधित ज्यादातर कार्यक्रमों पर फैसला कर लिया है। लेकिन हम इस साल पहले की तरह खर्च नहीं कर पाएंगे। अब हमें ज्यादा सर्तकता से काम करना पड़ेगा। हम पिछले साल दिसंबर तक 5 करोड़ डॉलर (करीब 200 करोड़ रुपये) की मोटी-ताजी रकम खर्च कर चुके हैं। लेकिन इस साल हम इतना नहीं खर्च करेंगे।’
पिछले साल कंपनी ने फरीदाबाद में स्थित अपनी कल-पुर्जों की फैक्टरी का विस्तार किया था, जबकि वडोदरा में नई मशीन फैक्टरी खोली। साथ ही, कंपनी ने वडोदरा में ही एक स्मॉल ट्रांसमीटर फैक्टरी भी खोली।
कंपनी इस साल बेंगलुरु के पास नेलामनमगला में एक फैक्टरी खोलने जा रही है। साथ ही, पिनया में एक प्रोसेस ऑटोमेशन फैक्टरी में विस्तार करने जा रही है। पिछले साल कंपनी ने मुंबई में एक मशीन सर्विस फैक्टरी की शुरुआत की थी, ताकि वह बड़े पॉवर प्लांटों तक अपनी पहुंच बना सके।
लेकिन पिछले साल की आखिरी तिमाही (अक्टू.-दिसंबर, 2008) में कंपनी के पास आने वाले ऑडरों में कमी आने लगी। इस वजह से कंपनी ने लागत में कमी करने की कई योजनाओं की शुरुआत की। वैसे, मंदी का असर कंपनी के पिछले साल के नतीजों पर नहीं दिखा।
पिछले साल कंपनी के खर्चे 16 फीसदी बढ़कर 6,101 करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गए। राजगोपाला का कहना है कि, ‘हमने लागत में कटौती करने की शुरुआत पिछली तिमाही से ही शुरू कर दी थी। इससे हमने काफी पैसा भी बचा लिया है। हमने यात्रा बजट और प्रशासनिक खर्च में कटौती शुरू कर दी। साथ ही, ऑफिस स्पेस के पूरे इस्तेमाल पर जोर देने लगे हैं। पहले हम एडवांस में ही ऑफिस तैयार रखा करते थे, लेकिन हमने अब ऐसा करना बंद कर दिया है।