खरीफ सत्र की प्रमुख फसल धान का रकबा 5 अगस्त को समाप्त सप्ताह में पिछले साल की समान अवधि की तुलना में अभी करीब 13 प्रतिशत कम है। प्रमुख धान उत्पादक राज्यों में बारिश में थोड़ी तेजी के बावजूद यह स्थिति होने से उत्पादन में 100 से 120 लाख टन की कमी का डर हो गया है।
सूत्रों ने कहा कि प्रमुख उत्पादक इलाकों में धान की सर्वाधिक बुआई वाले दिन अब करीब खत्म होने को हैं। अगर अब धान की बुआई के रकबे में कोई बढ़ोतरी होती भी है तो उत्पादन के इच्छित परिणाम आने की संभावना कम है। कारोबार और बाजार से जुड़े सूत्रों का कहना है कि अगस्त की शुरुआत तक धान उगाए जाने वाले 30 प्रतिशत रकबे में रोपाई नहीं हो सकी थी, ऐसे में पिछले साल की तुलना में उत्पादन में किसी वृद्धि की संभावना सीमित है।
इसके पहले के खरीफ सत्र में 1,110 लाख टन चावल का उत्पादन हुआ था।
कुछ राज्यों के किसानों ने पहले ही धान को छोड़कर कम अवधि वाली फसल जैसे दलहन और मोटे अनाज का विकल्प चुन लिया है।
भारतीय मौसम विभाग (आईएमडी) की रिपोर्ट के मुताबिक 1 जून से 8 अगस्त के बीच कुल मिलाकर देश भर में दक्षिण पश्चिमी मॉनसून से सामान्य से 7 प्रतिशत ज्यादा बारिश हुई है, लेकिन धान उत्पादन करने वाले प्रमुख राज्यों उत्तर प्रदेश में सामान्य से 40 प्रतिशत कम, पश्चिम बंगाल में 25 प्रतिशत कम और झारखंड में 48 प्रतिशत कम, बिहार में 35 प्रतिशत कम और ओडिशा में 9 प्रतिशत कम बारिश हुई है।
उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, पश्चिम बंगाल और ओडिसा की देश के कुल सालाना चावल उत्पादन में 40 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सेदारी है और यहां 1,200 लाख टन उत्पादन होता है।
इस साल धान के रकबे में पश्चिम बंगाल (12 लाख हेक्टेयर), झारखंड (9.3 लाख हेक्टेयर), बिहार (4.8 लाख हेक्टेयर), छत्तीसगढ़ (4.3 लाख हेक्टेयर), उत्तर प्रदेश (3.8 लाख हेक्टेयर), मध्य प्रदेश (3.7 लाख हेक्टेयर), ओडिशा (3.5 लाख हेक्टेयर) और तेलंगाना (2.8 लाख हेक्टेयर) में कमी आई है।
विश्व के दूसरे सबसे बड़े उत्पादक और चावल के सबसे बड़े निर्यात भारत की वैश्विक चावल कारोबार में 40 प्रतिशत हिस्सेदारी है। वित्त वर्ष 2021-22 में भारत ने 212 लाख टन चावल का निर्यात किया है, जिसमें से 39.4 लाख टन बासमती चावल है।
साप्ताहिक आंकड़ों से भी पता चलता है कि धान के अलावा दलहन का रकबा भी माम्ली कम हुआ है और यह 119.4 लाख हेक्टेयर की तुलना में 116.4 लाख हेक्टेयर रह गया है। बहरहाल मोटे अनाज, तिलहन, कपास, गन्ने व जूट का रकबा 5 अगस्त, 2022 को पिछले साल की समान अवधि की तुलना में ज्यादा है। करीब सभी फसलों की बुआई अब पूरी हो चुकी है।