facebookmetapixel
Advertisement
तेल की कीमतें घटीं, फिर भी सरकार को हो सकता है ₹1.65 लाख करोड़ का नुकसानOpening Bell: सेंसेक्स 425 अंक उछला, निफ्टी 24125 के पार; RIL में 2.5% से ज्यादा की तेजीDalmia Bharat का बड़ा विस्तार प्लान, जुटाएगी 4,000 करोड़ रुपयेNRI के पैसे पर RBI की पैनी नजर! अब रोजाना जारी हो सकते हैं अरबों डॉलर की आमद के आंकड़े18,000 करोड़ की AI सिटी पर बवाल! किसानों ने कहा, हमारी जमीन नहीं तो कोई सौदा नहींBond Ratings: कंपनियों की वित्तीय सेहत बिगड़ रही है? रेटिंग डाउनग्रेड ने बढ़ाई चिंताईशा अंबानी का बड़ा प्लान, ब्यूटी मार्केट में नई जंग शुरूMahindra Lifespaces: FY30 तक ₹10,000 करोड़ की बिक्री का लक्ष्य, क्या सफल होगी रणनीति?स्मार्टफोन नहीं, अब टैबलेट मचा रहे धमाल! बिक्री और निर्यात में रिकॉर्ड उछालछोटे शहरों पर BMW की नजर, 2026 में लॉन्च होंगे 26 नए मॉडल

रक्षाबंधन के बाद मेंथा में तेजी की उम्मीद

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 5:00 PM IST

अगले कुछ दिनों में मेंथा कारोबार में तेजी आने का अनुमान है। विशेषज्ञों और कमोडिटी जानकारों का कहना है कि इस फसल की बुनियादी चीजें मजबूती की ओर इशारा कर रही है।


ऐसे में माना जा रहा है कि रक्षाबंधन के बाद मेंथा 700 रुपये प्रति किलो के स्तर को पा सकता है। हालांकि पिछले पखवाड़े मेंथा की कीमतों में काफी गिरावट दर्ज की गयी थी। उत्तर प्रदेश के मुख्य मेंथा उत्पादक क्षेत्रों में बारिश से हुए नुकसान के बाद मेंथा की हार्वेस्टिंग अब लगभग पूरी हो गई है।

अनुमान है कि बारिश के चलते मेंथा की 10 से 15 फीसदी फसल बर्बाद हो गयी है। हालांकि, मेंथा की पत्तियों से तेल निकालना अब चिंता की मुख्य वजह है। मोतीवाल ओसवाल के कमोडिटी जानकार कुणाल शाह के अनुसार, तेल निकालने के लिए की जाने वाली आसवीकरण की प्रक्रिया तेजी नहीं पकड़ पा रही है।

एजेंल कमोडिटी के एक जानकार ने बताया कि इसके चलते मेंथा तेल की रिकवरी में 10 से 15 फीसदी होने का अनुमान है। इससे मेंथा तेल का कुल उत्पादन पहले के अनुमान से कम रहने की संभावना है। इस विशेषज्ञ के मुताबिक, मेंथा की पत्तियों को तोड़े जाने के बाद बेहतर रिकवरी के लिए उसे सुखाना बहुत जरूरी होता है।

लेकिन अनुकूल मौसम न होने से मेंथा की पत्तियों को ठीक से नहीं सुखाया जा सका है। इससे मेंथा तेल के कुल उत्पादन पर असर पड़ने की संभावना है। उत्तर प्रदेश के किसानों ने तय कर लिया है कि 650 रुपये से कम होने के बाद वे मेंथा को बाजार में नहीं लाएंगे।

वहां की स्थिति ऐसी है कि थोक किसानों और थोक कारोबारियों में अब कोई फर्क नहीं रह गया है। इससे मंडी में मेंथा तेल की आवक पर असर पड़ा है। सामान्य स्थिति में जहां रोजाना 180 किलो के 1,000 से 1,100 ड्रम मंडियों में आ पाते थे, वहीं इन दिनों इसकी आवक सिमटकर 500 से 600 ड्रम रोजाना रह गयी है। हालांकि मेंथा के नए सीजन में इसके रकबे में बढ़ोतरी हुई है।

Advertisement
First Published - August 13, 2008 | 11:01 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement